नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बिहार एसआइआर पर आपत्ति वाली याचिका को खारिज करते हुए साफ-साफ कहा कि चुनाव आयोग ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है, एसआईआर कवायद पूरी तरह वैध है. ये प्रक्रिया पूरी तरह सही है, ये कहकर एसआइआर की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि संवैधानिक व्यवस्था और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करने का पूरा अधिकार है. (नीचे भी पढ़ें)
क्या कहा अदालत ने : अदालत का कहना है एसआइआर वैध और संवैधानिक प्रक्रिया है. यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है. 11 दस्तावेजों पर विचार करने और आदेश के माध्यम से आधार कार्ड को शामिल किये जाने के बाद वे इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते कि चुनाव द्वारा मांगे गए दस्तावेजों का समूह मनमाना है. सीजेआइ ने कहा कि जिन मामलों में आयोग इस बात से संतुष्ट नहीं होता कि कोई व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने के लिए निर्धारित वैधानिक शर्तों को पूरा करता है, वहां आयोग का यह दायित्व होगा कि वह ऐसे व्यक्ति को कानून के अनुसार निर्णय के लिए केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास भेज दे. (नीचे भी पढ़ें)
अदालत के मुताबिक यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की जिम्मेदारी को मजबूत करती है. कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर काम नहीं किया. इसमें प्रक्रिया में कोई भी खामी नहीं है. यह चलता रहेगा. साथ ही चुनाव आयोग की सभी शक्तियां बरकरार रहेंगी. चुनाव आयोग ने शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया है.







