जमशेदपुर : टाटा मोटर्स के अफसर जावेद के सात सहयोगियों द्वारा दायर रिट याचिका डब्ल्यूपीसी 2292/2024 पर झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई. यह सुनवाई न्यायाधीश राकेश रौशन की अदालत में हुई. याचिका में टाटा मोटर्स के जेओ ग्रेड (कम वेतन वाला ग्रेड) को पुराने वेतन ढांचे में शामिल करने तथा बैक वेजेज दिए जाने की मांग की गई थी. सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ताओं के मामले में उचित अद्यावधिक नहीं है. न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि रिट कोर्ट प्रत्यक्ष रूप से किसी निजी पक्ष को आदेश पारित नहीं कर सकती. साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत रिट न्यायालय केवल संवैधानिक अथवा वैधानिक प्राधिकरणों के विरुद्ध ही आदेश पारित कर सकती है. (नीचे भी पढ़ें)
इस क्रम में यह भी उल्लेखनीय है कि टेल्को वर्कर्स यूनियन (रजि.-98) द्वारा दायर याचिका डब्लूपीसी 3209/2024 में डीएलसी एवं एलसी को पक्षकार बनाया गया है. यूनियन का आरोप है कि टाटा मोटर्स यूनियन (कथित फर्जी यूनियन) ने संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर मजदूर हितों के विरुद्ध समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके कारण मजदूरों के वेतन में वृद्धि के बजाय कटौती कर दी गई. वहीं, टेल्को वर्कर्स यूनियन की याचिका डब्ल्यूपीसी 7038/2017 में बहस पूरी होने के बाद 02 फरवरी को निर्णय सुनाए जाने की संभावना है. इस फैसले के साथ ही जेओ ग्रेड के भविष्य का प्रश्न पूरी तरह टेल्को वर्कर्स यूनियन की कानूनी लड़ाई और मजबूती पर निर्भर हो गया है. टेल्को वर्कर्स यूनियन ने दोहराया है कि वह जेओ ग्रेड को पुराने वेतन ढांचे में बहाल कराने एवं बैक वेजेज दिलाने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा हेतु अपनी लड़ाई जारी रखेगा.



