
जमशेदपुर : टाटा स्टील अपनी समूह की कंपनियों की संख्या घटाने जा रही है. इस कड़ी में कंपनी ने काम शुरू कर दिया है, जिसके तहत प्रथम चरण में सहायक कंपनियों को चार कलस्टर में बांटा गया है, जिसमें लांग प्रोडक्ट, माइनिंग, यूटिलिटीज और डाउनस्ट्रीम शामिल है. इसके तहत तार कंपनी (दी इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट) और टाटा मेटालिक्स का टाटा लांग प्रोडक्ट (टाटा स्टील द्वारा अधिग्रहित उषा मार्टिन) का समायोजन पिछले दिनों तक दिया गया, जिसके तहत नये बोर्ड को बनाने की प्रक्रिया चल रही है. इसके संचालन को लेकर छह से नौ माह का समय कंपनी ने लिया है, जिसके बाद तीनों कंपनियों का मैनेजमेंट और तमाम प्रबंधकीय क्षमता एक साथ चलेगी. कर्मचारियों को जरूरत के हिसाब से एक कंपनी से दूसरी कंपनियों में भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है. कंपनी को ज्यादा धारदार और कारोबारी लिहाज से ज्यादा बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है. नयी बोर्ड के गठन के बाद सरकार के विभिन्न स्तरों पर मंजूरी के लिए भेजा जायेगा, जिसमें समय लग सकता है. टाटा स्टील के मुताबिक, टाटा स्टील स्केल, सिनर्जी और सिम्प्लीफिकेशन को संचालित करने और सभी स्टेक होल्डरों के लिए मूल्य का सृजन करने के लिए अपने भारतीय फुटप्रिंट का पुनर्गठन कर रही है और सूचीबद्घ व असूचीबद्घ सहायक कंपनियों को 4 क्लस्टर में विभाजित कर रही है. प्रस्तावित समेकन महत्वपूर्ण तालमेल बनाएगा और कंपनी को लॉन्ग प्रोडक्ट्स खंड में भविष्य के विकास की दिशा में ले जाएगा. कंपनी ने कहा है कि लांग प्रोडक्ट को लेकर प्रक्रिया 6 से 9 महीनों में प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, जो आवश्यक नियामक अनुमोदन के अधीन है. टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने इस मसले पर कहा है कि अब हम स्केल, सिनर्जी और सिम्प्लीफिकेशन को संचालित करने के लिए अपनी भारतीय सहायक कंपनियों को चार वर्टीकल में फिर से संगठित करने जा रहे हैं. उन्होंने विश्वास जताया है कि यह हमारे स्टेकहोल्डरों के लिए मूल्य का सृजन करेगा. दूसरी ओर, सूत्र बता रहे है कि टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लिमिटेड (जुस्को), टीआरएफ और टाटा पिगमेंट का समायोजन किया जाना है, जो एक तरह का काम करती है. नागरिक सुविधा प्रदान जुस्को करती है तो टीआरएफ स्ट्रक्चर खड़ी करने वाली कंपनी है जबकि टाटा पिगमेंट पेंट बनाने वाली कंपनी है. एक साथ इन कंपनियों को किया जायेगा. यहीं वजह है कि जुस्को का नाम बदलकर टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कर दिया गया है. टाटा स्टील माइनिंग की अलग कंपनी बन चुकी है, जिसमें सारी छोटी-छोटी माइनिंग कंपनियों को समायोजित किया जा रहा है, जिसकी प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए सारे कंपनियों के बोर्ड के सदस्यों को बोल दिया गया है. (नीचे और भी है टाटा स्टील में होने वाले बदलाव से जुड़ी खबरें, जरूर पढ़ें)

विदेशों में रणनीतिक तौर पर कारोबार समेटने की तैयारी
टाटा स्टील अपने विदेशों के संयंत्रों को समेटने में लगी है, जहां सबसे ज्यादा कंपनी को घाटा होता नजर आ रहा है. इस कड़ी में टाटा स्टील यूरोप को पहले ही बेचने की तैयारी की गयी थी, लेकिन कई सारे अड़ंगा आने के कारण इसको नहीं बेचा जा सका है. कंपनी ने एसएसएबी स्वीडन के साथ ईमूदीन स्टील वर्क्स समेत टाटा स्टील के नीदरलैंड्स कारोबार के संभावित अधिग्रहण के लिए प्राप्त दिलचस्पी पर आधारित बातचीत शुरू की है. कंपनी ने सुपरवाइजरी बोर्ड और टाटा स्टील नीदरलैंड्स के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के साथ बातचीत शुरू की है और ड्यू डिलिजेंस और स्टेक होल्डरों के परामर्श समेत यह प्रक्रिया अगले चरण में जाएगी. कंपनी बैलेंस शीट के अतिरिक्त ऋण को चुकाने की दिशा में हर रणनीतिक पुनर्गठन की आदमनी को नियोजित करने के लिए प्रतिबद्घ है. कंपनी ने टाटा स्टील नीदरलैंड्स और टाटा स्टील यूके को अलग करने के लिए प्रक्रिया भी शुरू की है और भविष्य में नीदरलैंड्स और यूके के कारोबार के लिए अलग-अलग रणनीतिक रास्ते अपनाएगी. टाटा स्टील ने टाटा स्टील यूके के दीर्घकालिक भविष्य की सुरक्षा के लिए संभावित उपायों पर यूके सरकार के साथ अपनी बातचीत जारी रखी है और भविष्य में टाटा स्टील इंडिया से किसी भी फंडिंग सपोर्ट की आवश्यकता के बिना व्यवसाय को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी विकल्पों की समीक्षा कर रही है. टाटा स्टील के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीएफओ कौशिक चटर्जी कहा है कि टाटा स्टील के नीदरलैंड्स कारोबार के संभावित अधिग्रहण के बारे में एसएसएबी स्वीडन द्वारा शुरू की गई बातचीत के आधार पर, हम एक उचित प्रक्रिया करेंगे और परामर्श और उचित परिश्रम के साथ अगले चरण में जाएंगे. (नीचे और भी है टाटा स्टील में होने वाले बदलाव से जुड़ी खबरें, जरूर पढ़ें)

टाटा स्टील भारत में नयी ऊर्जावान कंपनियों का करेगी अधिग्रहण
टाटा स्टील की ओर से भारत में नयी ऊर्जावान कंपनियों का अधिग्रहण करने जा रही है. ओड़िशख़ के नीलांचल इस्पात कंपनी लिमिटेड को अधिग्रहित करने की इच्छा जतायी गयी है. यह कंपनी केंद्रीय लोक उपक्रम एमएमटीसी, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी), भारतीय हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) और मेकॉन और ओड़िशा सरकार की आइपीआइसीओएल और ओड़िशा खनन निगम लिमिटेड के साथ काम करती है. इसकी पुष्टि टाटा स्टील के एमडी ने की है और कहा है कि इसके अधिग्रहण को लेकर हमारी रूचि है. (नीचे और भी है टाटा स्टील में होने वाले बदलाव से जुड़ी खबरें, जरूर पढ़ें)

कैसे चलेगी समायोजित होने वाली कंपनियों की यूनियन
तार कंपनी, जुस्को, टीआरएफ, टाटा पिगमेंट, टाटा स्टील लांग प्रोडक्ट समेत तमाम कंपनियों का अलग-अलग समायोजन हो रहा है. इन सारी कंपनियों में अलग-अलग यूनियन संचालित होती है. ऐसे में सारे लोग यह आशंकित है कि इन कंपनियों की यूनियनों का क्या होगा. कर्मचारी कैसे काम करेंगे. यूनियनों का भी क्या समायोजन होगा, इन सारे सवालों को लेकर जरूर यूनियन के नेता आशंकित है. हालांकि, टाटा स्टील में टाटा वर्कर्स यूनियन और टाटा स्टील की ही टीजीएस में टिस्को मजदूर यूनियन चल रही है, ऐसे ही मॉडल पर यूनियन को चलाने का उपाय पर मैनेजमेंट सोच रही है. हालांकि, इसका फाइनल रुपरेखा छह से नौ माह के बाद सामने आयेगा कि किस तरह मैनेजमेंट काम करेगा और किस तरह यूनियन.













