
रांची/दुमका/बेरमो : झारखंड में होने वाले दो विधानसभा के लिए उपचुनाव हो रहा है. दुमका सीट काफी महत्वपूर्ण सीट है, जहां से खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सीट छोड़ी थी, जहां से उनके छोटे भाई बसंत सोरेन चुनाव मैदान में है जबकि भाजपा की प्रत्याशी लुइस मरांडी है. मंगलवार की सुबह से 18 राउंड की मतगणना शुरू हुई, जिसके 11 राउंड के बाद लुइस मरांडी 1108 मतों से आगे चल रही है जबकि बसंत सोरेन 1108 मतों से पीछे चल रहे है. झामुमो के बसंत सोरेन को 11वें राउंड के बाद कुल 46517 मत जबकि भाजपा की लुइस मरांडी को 47625 वोट मिल चुके है. लेकिन बेरमो सीट पर कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह की मौत के बाद उनके बेटे कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह ने अपनी जीत पक्की कर ली है. वहां 17 राउंड की मतगणना होना है, जिसमें से 13 राउंड के बाद 13043 मतों से आगे चल रहे है. बचे हुए चार राउंड में उनके प्रतिद्वंदी भाजपा नेता योगेश्वर महतो बाटुल को 13 हजार से अधिक मत लाना होगा, जिसके बाद ही वे जीत सकेंगे जबकि मतगणना काफी कम ही बचा हुआ है. वैसे दुमका की सीट पर अभी कुल 7 राउंड बचा हुआ है, जिसमें बसंत सोरेन 1108 मतों से पीछे चल रहे है. 7 राउंड में कुछ भी बदलाव हो सकता है. इसको लेकर झारखंड की पूरी नजर लगी हुई है और झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के लिए यह करो या मरो वाली स्थिति है और सरकार का लिटमस टेस्ट जैसा ही है. दुमका और बेरमो के उपचुनाव के लिए मतदान 3 नवंबर को हुआ था, जिसमें दुमका में 65.27 फीसदी जबकि बेरमो में 60.20 फीसदी मतदान हुआ था. वैसे 2019 के विधानसभा चुनाव में दुमका में 67.14 फीसदी और बेरमो में 60.93 फीसदी मतदान हुआ था. इस चुनाव को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यहां चार मुख्यमंत्रियों का प्रतिष्ठा दावं पर है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद दुमका सीट से चुनाव जीते थे, जहां से इस्तीफा देने के बाद उनकी सीट पर उनके छोटे भाई बसंत सोरेन को उन्होंने प्रत्याशी बनाया है. हेमंत सोरेन खुद बरहेट और दुमका से विधानसभा चुनाव 2019 में लड़े थे, जहां दोनों से उन्होंने जीत दर्ज की थी, जिसमें उन्होंने दुमका की सीट छोड़ दी थी. यह क्षेत्र सोरेन परिवार का क्षेत्र माना जाता रहा है, जिस कारण भी बड़ा प्रतिष्ठा का विषय है जबकि बेरमो सीट कांग्रेस के लिए परंपरागत सीटों में से एक माना जाता है, जहां से राजेंद्र बाबू चुनाव जीतते रहे थे, इस तरह उनके पुत्र को टिकट दिया गया है, जिस कारण उनकी जगह पर अनूप सिंह चुनाव जीतेंगे या नहीं, यह देखने वाली बात होगी. मुख्यमंत्री खुद बसंत सोरेन को चुनाव जीताने के लिए प्रयासरत थे. इसी तरह शिबू सोरेन भी पूर्व मुख्यमंत्री रहे है और उनकी परंपरागत सीट है, जहां उनकी जीत सोरेन परिवार के लिए भी काफी मायने रखेगा. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी अपनी पूरी ताकत दुमका में लगा दी थी. झाविमो का विलय करने के बाद बाबूलाल मरांडी का यह पहला चुनाव था, जिसका रिजल्ट उनकी भाजपा में वापसी को सही या गलत करार देने के लिए टेस्टिंग फ्लोर माना जा रहा है. यह उनका भविष्य का राजनीतिक कैरियर भी तय कर सकता है. अगर जीत होती है तो कद बाबूलाल मरांडी का बढ़ सकता. इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास खुद बेरमो में चुनाव प्रचार में थे.













