
रांची : झारखंड के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को दिरनाकर करते हुए झामुमो द्वारा प्रत्याशी देने से झारखंड के कांग्रेस नेताओं में काफी गुस्सा देखा जा रहा है. झामुमो प्रत्याशी महुआ माजी के नामांकन के दौरान कांग्रेस ने अपने आपको किनारा कर दिया है. कांग्रेस नामांकन को लेकर काफी नाराज दिख रही है. कांग्रेस की नाराजगी के बीच मंगलवार की अहले सुबह रांची पहुंच गये. कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय रांची पहुंचे और बैठक का दौर शुरू कर दिया. विधायकों और स्थानीय नेताओं के साथ उन्होंने रांची स्थित होटल बीएनआर में मीटिंग रखी गयी थी, लेकिन मीटिंग को बीच में छोड़कर वे वन टू वन बातचीत करने लगे. सारे बड़े और पुराने नेताओं ने कांग्रेस को दरकिनार करने पर कड़ी नाराजगी जतायी और अपना विरोध दर्ज कराया. इस दौरान कांग्रेस के अधिकांश विधायकों ने कहा कि किसी भी हाल वे लोग झामुमो की मनमर्जी को बरदाश्त नहीं करेंगे. विधायकों ने कहा कि अगर झामुमो के साथ रहना मजबूरी है तो बाहर से समर्थन कर दिया जाये, सरकार में शामिल होने की जरूरत ही नहीं है. कांग्रेस भवन से लेकर रांची के होटल तक में लोगों की नाराजगी को झेलना पड़ा. कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय के समक्ष विधायक दीपिका पांडेय सिंह समेत कई विधायकों ने मोरचा खोल दिया कि ऐसे नहीं चलता है कि झामुमो मनमर्जी करती रहे और हम लोग देखते रहे. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि अगर कोई कहता है कि कांग्रेस नतमस्तक है तो वह जान लें कांग्रेस किसी पार्टी के समक्ष नतमस्तक नहीं होने वाली है.
मांडर चुनाव भी मजबूरी बनी हुई है
मांडर में भी उपचुनाव होने वाला है. कांग्रेस की वहां मजबूरी भी है. कांग्रेस को झामुमो का समर्थन चाहिए होगा ताकि वहां से खाली हुई सीट को फिर से कांग्रेस हासिल कर सके. वहां से मांडर से बंधु तिर्की चुनाव जीते थे, जिनको सजा सुनाये जाने के बाद से वह सीट खाली हो गयी है. उस सीट को भी खाली करने के बाद कांग्रेस चाहती है कि बंधु तिर्की की बेटी को ही चुनाव लड़ाया जाये. बंधु तिर्की को जीताने के लिए झामुमो का साथ लेना भी मजबूरी है, यहीं वजह है कि कांग्रेस ज्यादा कुछ कहने की स्थिति में नजर नहीं आ रही है.




