
सरायकेला : केंद्र और राज्य सरकार भले ही आदिवासी समाज के विकास और उन्नति और प्रगति के लिए निरंतर विभिन्न प्रकार की योजनाओं के माध्यम से प्रयासरत है, लेकिन सरकारी अधिकारियों के उदासीनता के कारण आज करोड़ों की योजना महज एक शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है. जी हां हम बात कर रहे सरायकेला-खरसावां जिला के कुकड़ू प्रखंड क्षेत्र के राजकीयकृत प्लस टू विद्यालय तिरुलडीह में पढ़ने वाले छात्रों लिए तिरुलडीह थाना के समीप कल्याण विभाग द्वारा करोड़ों की लागत से वर्षों पूर्व बने दो मंजिला आदिवासी हॉस्टल की, जो आज महज एक शोभा की वस्तु बनकर रह गया है. यह आदिवासी हॉस्टल पिछले करीब डेढ़ साल से बंद पड़ा हुआ है. जहाँ एक भी छात्र हॉस्टल में नही रहता है. जिसके कारण पूरा हॉस्टल जर्जर होता नजर आ रहा है. वर्तमान में इस हॉस्टल भवन के खिड़कियों में लगे कांच और दरवाजे टूटे हुए नजर आ रहे हैं. वैसे यह हॉस्टल तिरुलडीह थाना से सटा हुआ है. जिसके कारण तिरुलडीह थाना के पुलिसकर्मियों को भी अनहोनी का डर बना रहता है. वैसे स्कूल के प्राचार्य प्रशांत सिंह मुरा की अगर माने तो करीब 6 महीने पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी ने हॉस्टल का जांच करने आए थे, लेकिन अबतक हॉस्टल को दुरुस्त किये जाने के दिशा में कोई भी पहल नही किया.














