
संतोष वर्मा
चाईबासा : झारखण्ड के पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत चाईबासा से लगभग 80 किलोमीटर दूर मझगांव प्रखंड में अवस्थित बेनीसागर नामक पुरातन स्थल वो रहस्यमयी किताब है जो पर्यटकों के मन में रोमांच भरते हुए उन्हें अपनी ओर खींचती है। कहते हैं इस जगह का नाम बेनीसगर राजा बेनु के नाम पर रखा गया था जिन्होंने इस तालाब का निर्माण कराया था। ये तालाब करीब 340 मीटर लंबा और 300 मीटर चौड़ा है जिसमे चारों ओर खिले कमल के फूल उसकी शोभा बढाते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो तालाब के अंदर एक चांदी से बना मन्दिर मौजूद है परंतु अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इस तालाब की कभी ना सूखने की अद्भुत विशेषता इस स्थान के रहस्यों में से पहली रहस्यमयी कहानी है जो पर्यटकों के मन मे कौतूहल पैदा करती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसंधान के दौरान पहले बेनीसागर से पत्थर पर उत्कीर्ण अभिलेख मिले जो ब्राह्मणी-संस्कृति से मेल खाते हैं। पुरालिपिक विशेषज्ञों द्वारा इसकी पढ़ाई की गयी, जिससे यह पता चलता है कि यह क्षेत्र पांचवीं से बारहवीं सदी तक बसा रहा होगा। यहां वर्ष 2003 से लगातार वैज्ञानिक उत्खनन का कार्य चल रहा है।

खुदाई के दौरान अब तक यहां कई देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्त्तियां मिल चुकी हैं, जिनमे शिवलिंग, भैरव, सूर्या, गौतम बुद्ध, गणेश,अकुलिशा आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही यहां 50 एकड़ क्षेत्र में फैला मंदिर परिसर भी मिला है, जिससे इस बात की जानकारी मिलती है कि यह इलाका अपने समय का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल रहा होगा। खनन के दौरान यहां मूर्तियों के अलावा मिट्टी के परकोटा, मुहर, मैथून शिल्प आदि भी मिले हैं जिन्हें वहां बने म्यूजियम में संग्रहित कर के रखा गया है जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। म्यूजियम से कुछ दूर जाने पर पर्यटकों को पुरानी सभ्यता से जुड़ी इमारतों के बचे हुए कुछ अवशेष देखने को मिलते हैं जिनकी वक्र बनावट को देख ऐसा प्रतीत होता है जैसे वो पुराने समय का स्नान गृह हों। वहीं म्यूजियम की दूसरी ओर मंदिरों के बचे अवशेषों को देख ऐसा मालूम पड़ता है मानों वो स्थान 500 साल पहले पूजनीय स्थल रहा होगा। पर्यटक यहां शिव के 108 से भी ज्यादा शिवलिंग के साथ-साथ भगवान हनुमान की अविश्वासनिय मूर्ति भी देख सकते हैं। तालाब के चारों तरफ पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यू पॉइंटस बनाए गए हैं जहाँ बैठ पर्यटक प्रकृति के सौंदर्यदर्शन का लुत्फ़ भी प्राप्त कर सकते हैं। आपने नाम की तरह ही ये स्थान रहस्यों का सागर है जिनकी खोज आज भी पुरातत्व विभाग द्वारा जारी।















