
जमशेदपुर : लोक आस्था का महापर्व छठ अब कुछ ही दिन बच गए हैं. 20 नवंबर को छठ है. आम दिनों में दशहरा के बाद से ही छठ की तैयारी शुरू हो जाती थी. इस साल वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर लगभग साभी पर्व- त्यौहार सरकारी गाइडलाइंस के तहत मनाए जा रहे हैं. नदियों एवं जलाशयों के तट पर संपन्न होनेवाला लोक आस्था का महापर्व छठ इस साल कैसे मने झारखंड सरकार की ओर अबतक कोई गाइडलाइंस जारी नहीं किये जाने से छठ व्रती, व्यपारी और स्वयंसेवी संगठनों के लोग दुविधा में हैं. आपको याद दिला दें कि झारखंड सरकार ने दुर्गा पूजा को लेकर भी देर से गाइडलाइंस जारी किया था, जिसको लेकर आयोजकों एवं हिंदूवादी संगठनों के साथ बीजेपी ने खूब हंगामा मचाया था. कई जगहों पर तो प्रशासन और पूजा कमेटियां आमने- सामने आ गयीं थी. झारखंड में लोक आस्था के इस महापर्व को मनानेवाले लोगों की अच्छी- खासी तादाद हैं. रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग जैसे शहरों में छठ व्रत करनेवालों की संख्या बहुत अधिक है. करोड़ों का कारोबार होता है. (आगे की खबर नीचे पढ़ें)
इस महापर्व में न केवल व्रती बल्कि स्वयंसेवक भी तन मन और धन से समर्पित होकर इस पर्व को संपन्न कराते हैं. वहीं अबतक सरकारी गाइडलाइंस जारी नहीं होने से स्वयंसेवी संगठनों एवं व्रतधारियों के बीच संशय बना हुआ है. नदियों एवं जलाशयों की साफ-सफाई प्रशासनिक स्तर पर शुरू नहीं हुई है. तो क्या झारखंड सरकार आस्था के साथ फिर खिलवाड़ करने का काम करने जा रही है? क्या सरकारी आदेश हिंदूवादी संगठनों और विपक्ष के हंगामे के बाद जारी करनेवाली है. वैसे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर छठ को लेकर जरूरी गाइडलाइंस जारी करने की मांग की है ताकि लोक आस्था के महापर्व में कोई व्यवधान उतपन्न न हो. वैसे जमशेदपुर में स्वयंसेवी संगठन अपने स्तर से तैयारियों में जुट गए हैं. हालांकि शहर की दोनों प्रमुख नदियों स्वर्णरेखा और खरकई के घाटों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है. अब झारखंड सरकार के आदेश का इंतजार प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों को है.






