
रांची : झारखंड के करीब चार हजार वकीलों की प्रैक्टिस खतरे में पड़ गई है. इन वकीलों ने प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नहीं भेजा है. बार काउंसिल ने सभी को 31 दिसंबर तक सत्यापन कराकर काउंसिल को ऑनलाइन भेजने को कहा था. सभी जिले के बार संघों के माध्यम से भेजना था. बार काउंसिल ने कहा है कि जिन वकीलों ने सत्यापन नहीं कराया है. उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे. वह प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे और कल्याणकारी योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिलेगा. सत्यापन कराने के लिए बार काउंसिल ने कई बार तिथि बढ़ायी. इसके बाद 31 दिसंबर अंतिम तिथि निर्धारित की. राज्य में झारखंड बार काउंसिल से संबद्ध करीब 30 हजार वकील
निबंधित हैं. सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल के वेरिफिकेशन रूल्स 2015 के तहत सभी बार काउंसिल को वकीलों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन को अनिवार्य बताया है. सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है. इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने राज्य के सभी वकीलों को अपने प्रमाणपत्रों को सत्यापन कराने का निर्देश दिया था. वकीलों को अपने प्रमाणपत्रों के साथ एक फॉर्म भर कर देना था. फिर बार काउंसिलि संबंधित विश्वविद्यालय और संस्थानों में प्रमाणपत्रों को जांच के लिए भेजती है. सत्यापन पूरा होने के बाद वकील को काउंसिल के सभी कार्यक्रमों में शामिल होने की छूट मिलती है. साथ ही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ और काउंसिल के चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिलती है. बीसीआई ने सभी जिला और सदस्यों से ईमेल या व्हाट्सएप के माध्यम से आवश्यक सूचनाएं मांगने और उसे जमा कर सीधे बार काउंसिल ऑफ इंडिया को ईमेल के माध्यम से भेजने को कहा था. दूसरी ओर, झारखंड के सारे कोर्ट में फिजिकल कोर्ट चलाने का मुद्दा गर्माया हुआ है. वकीलों ने साफ तौर पर चेतावनी दी थी कि 4 जनवरी 2021 तक अगर फिजिकल कोर्ट पर फैसला नहीं होता है तो वे लोग ऑनलाइन कोर्ट का बहिष्कार करेंगे. इसको देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के निर्देश पर झारखंड स्टेट बार काउंसिल को एक पत्र हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जेनरल अंबुज नाथ ने भेजा है, जिसमें कहा गया है कि फिर से फिजिकल कोर्ट को शुरू करने को लेकर कोर कमेटी की बैठक 5 जनवरी 2021 को बुलायी गयी है जकि एक और बैठक 8 जनवरी की शाम 5 बजकर 30 मिनट पर बुलायी गयी है, जिसमें फिजिकल कोर्ट चलाने के मुद्दे पर बातचीत होगी.







