रांची/हजारीबाग : झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन हिदायतुल्ला खान एवं सदस्य कारी बरकत अली गुरुवार को हजारीबाग पहुंचे, जहां उन्होंने हाल ही हुई भाई-बहन की हत्या के पीड़ित परिवार से मुलाकात की. मृत रिजवान एवं तमन्ना के परिजनों से घटना और उनके दर्द की दास्तान सुन कर सभी भावुक हो गए. इस अवसर पर चेयरमैन हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में बच्चों की इस तरह हत्या होना अत्यंत शर्मनाक और भयावह है. उन्होंने प्रभावित परिवार को भरोसा दिलाया कि आयोग उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगा और हर हाल में न्याय दिलाने का प्रयास करेगा. उन्होंने भाई-बहन की हत्या के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर हजारीबाग पुलिस की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से पत्र भेजे जाने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की, जो एक सकारात्मक कदम है. साथ ही, उन्होंने मौके पर उपस्थित पड़ोसियों से अपील की कि वे भी अपने स्तर पर इस परिवार की देखभाल करें. उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी सरकारी स्तर पर हर संभव सहायता दिलाने का प्रयास कर रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)

इसके बाद वे सर्किट हाउस पहुंचे जहां 23 अप्रैल के ट्रिपल मर्डर केस के प्रभावित परिवारों ने उनसे मुलाकात की. पीड़ित परिवार के लोगों ने आयोग के चेयरमैन के सामने कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने शुरू से ही इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया. उनका आरोप है कि थाने के एक कथित मुखबिर ने उनसे कहा था कि उसे पता है कि उनके लोग कहां हैं और पैसे देने पर उन्हें खोजकर वापस लाया जा सकता है, लेकिन बाद में उन्हीं लोगों के शव बरामद हुए. इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. (नीचे भी पढ़ें)

मौके पर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि प्रभावित परिवारों द्वारा दी गई कई जानकारियों और साक्ष्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस ने इस मामले में गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाया. उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुलिस यह कह रही थी कि पांच लोग एक साथ थे, तो अब तक केवल तीन शव ही क्यों मिले हैं? बाकी दो लोग कहां हैं? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या थाना किसी मुखबिर के भरोसे चल रहा था? यदि मुखबिर को पहले से जानकारी थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? श्री खान ने राज्य सरकार से ट्रिपल मर्डर केस की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके. उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल रिपोर्ट लेना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना भी है. जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती और हर सवाल का जवाब नहीं मिलता, तब तक आयोग इस मामले को गंभीरता से उठाता रहेगा.






