
जमशेदपुर : पंचायती राज व्यवस्था के सबसे सशक्त सिपाही के रूप में चौकीदार और दफादार होते हैं. इनके जिम्मे गांव और पंचायत की सुरक्षा रहती है. लेकिन झारखंड के पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले के दफादार और चौकीदार सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं. 1 जनवरी 1990 से लेकर आज तक पूर्वी सिंहभूम जिले के सेवानिवृत हुए दफादारों और चौकीदारों के आश्रितों को नौकरी नहीं मिली है, जबकि राज्य के दूसरे जिलों के दफादारों और चौकीदारों के आश्रितों को नौकरी दे दी गई है. अपने 9 सूत्री मांगों को लेकर झारखंड राज्य दफादार चौकीदार पंचायत संघ के बैनर तले जिले के चौकीदारों एवं दफ़ादारों ने जिला मुख्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन कर राज्य सरकार और दिशोम गुरु शिबू सोरेन से अपने लिए इंसाफ मांगा. इन्होंने बताया कि जिले के दफ़ादारों और चौकीदारों से गांव की रखवाली छोड़ दूसरे कामों में सेवा ली जाती है. यही कारण है, कि गांव से बच्चों और युवतियों का पलायन हो रहा है. यानी ह्यूमन ट्रैफिकिंग और इनका इशारा था. इन्होंने सरकार से बंद पड़े बहाली और जिला पुलिस के तर्ज पर 13 माह का वेतन, जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन, वर्दी भत्ता, गाड़ी भत्ता वगैरह दिए जाने की मांग की है.




