
विश्व भर में आज के दिन को एक खास दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे विश्व नींद दिवस कहते है. विज्ञानिकों के मुताबिक स्प्रिंग वर्नल इक्विनॉक्स से एक दिन पहले इस दिन को मनाया जाता है. ऐसे कई लोग होगे जिन्हें अंग्रेजी शब्द स्प्रिंग वर्नल इक्विनॉक्स के बारे में पता नहीं होगा. (नीचे भी पढ़ें)
स्प्रिंग वर्नल इक्विनॉक्स क्या है
स्प्रिंग वर्नल इक्विनॉक्स को विषुव नाम दिया गया है. विषुव एक लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ ”बराबर रात” है. विषुव के समय सूर्य भूमध्य रेखा को पार करके उत्तर की ओर बढ़ता है, जिस दौरान दिन और रात के लगभग बराबर घंटे होते हैं. स्प्रिंग वर्नल इक्विनॉक्स वर्ष में केवल दो बार आता है. पहला मार्च के महीने में और दूसरा सितंबर के महीने में. मार्च के महीने में वसंत के आगमन की शुरूआत को चिह्नित करता है और दूसरा सितंबर में शरद ऋतु के समय. (नीचे भी पढ़ें)
आज यानी कि 19 मार्च को वार्षिक नींद दिवस मनाया जा रहा है.इसकी शुरूआत 2008 से की गई . स्वास्थ्य के जानकारों ने जब नींद की दवा व अनुसंधानों पर रिर्सच करना शुरू किया तो पाया कि नींद लेना कितना आवश्यक है व नींद नहीं लेने से लोगों को कई मुस्किलों का सामना करना पड़ता है.इस दिन को उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को एक साथ लाया जाने का था ताकि सोने के संबंधित जानकारी साझा किया जा सके. स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं ने नींद के दावों को संबोधित करते हुए इस दिन की शुरूआत की.2021 वर्ष में नींद दिवस का स्लोगन “नियमित नींद, स्वस्थ भविष्य” रखा गया है. आज के समय में अकेलापन लोगों के बीच ज्यादा देखने को मिलती है. लोग अकेले रहना पसंद करते है, उन्हें देश दुनिया से कोई मतलब नहीं होती है. कभी- कभी तो ऐसा भी होता है जब लोग अपने आप में ही सिमट कर रह जाते है. आज लोगों के बीच आक्रोश की समस्या ज्यादा देखी जाती है, व्यक्ति हो या बच्चे बात- बात पर आक्रोशित होते है. (नीचे भी पढ़ें)
ये कारण सिर्फ और सिर्फ नींद की समस्या के कारण होता है. ऐसे लोग समाज में कम देखे जाते है, क्योंकि वे स्वं की दिक्कतो से ज्यादा परेशान होते है कि उन्हें समाज में रहना पसंद नहीं. उनके मन में समाज के प्रति अच्छी भावना नहीं होती है. समाज में सक्रियता बनाए रखने के लिए भरपूर नींद ली जानी चाहिए. सामाज में जो बच्चे दूसरों से घुल मिल नहीं पाते है, इसका कारण है नींद. भरपूर नींद लेना बेहद आवश्यर है, कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद सभी को अवश्य लेनी चाहिए. इस भागम- भाग वाली दौड में लोग नींद के पीछे नहीं पैसे के पीछे दौड़ते है. आज कल विद्यार्थी दिन भर सोते है और रात में पढ़ाई करते है.दिन के समय सोने से किसी न किसी प्रकार की डिस्टबेंस घरो में जरूर होती है, जिसके कारण नींद पूरी नहीं हो पाती है और वे चिड़चिडे़ स्वभाव के हो जाते है. ऐसा करना गलत है इससे विद्यार्थियों के बीच नाना प्रकार की बीमारी उत्पन्न होता है. विद्यार्थियों को प्रातः उठ कर पढ़ाई करना चाहिए, और समाज के प्रति भी कार्य करना चाहिए. नींद का भरपूर प्रयोग से मन, मस्तिष्क ठीक से कार्य करता है. नींद भरपूर नहीं लेने से आलस्य, सुस्ती, कमजोरी जैसी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है. वही इस वजह से दिल की समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है.




