
शार्प भारत डेस्क : रमजान का महीना समाप्त होने पर मुस्लिम समुदाय द्वारा ईद उल-फितर पर्व मनाया जाता है. रमजान का महीना पूरे एक महीने का होता है. रोजा रखने के लिए सूर्योदय से पहले सेहरी होती है. इसके बाद पूरे दिन कुछ भी नहीं खाया जाता है. वही सूरज ढलने के बाद मगरिब की आजान के बाद रोजा खोला जाता है. रोजा खोलने को इफ्तार कहते है. इसके साथ ही जो लोग रोजा रखते है वे पांच वक्त की नमाज भी अदा करते हैं. इस पर्व में लोग सुख-शांति और खुदा से बरक्कत की दुआएं मांगते है. सऊदी अरब में ईद का चांद नजर आने के अगले दिन ही ईद उल फितर का त्योहार मनाते हैं. इस वर्ष ईद का त्योहार 13 या 14 मई को मनाये जाने की उम्मीद है. आज यानी 12 मई को अगर सऊदी में चांद दिख गया तो ईद 13 मई को मनायी जाएगी. अगर चांद नहीं दिखा तो 14 मई को ईद मनाया जाएगा.
ईद की कुछ खास बातें
मुस्लिम समुदाय में ईद साल में दो बार मनायी जाती है. पहली ईद को ईद उल फितर और दूसरी ईद को ईद-उल-जुहा या बकरीद कहते हैं. पैगम्बर मोहम्मद ने सन् 624 ईश्वी में जंग-ए-बदर के बाद मनायी थी. रमजान के इस पाक के महीने में कुरान की तिलावत करके अपनी आत्मा को शुद्ध किया जाता है. ईद भाईचारे व आपसी मेल को बढ़ावा देने का पर्व है. ईद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग नए वस्त्र धारण करते हैं और अपने परिचित, सगे-संबंधियों व ईष्ट मित्रों से मिलते हैं और ईदी प्राप्त होती है. परन्तु कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य सप्ताह लागू होने के कारण मुस्लिम समुदाय के लोग इस बार सादगी से इस त्योहार को मनायेंगे.












