
रांची: झारखंड के 11 गैर अनुसूचित जिलों में होने वाली शिक्षक नियुक्ति के अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश नवीन सिन्हा और न्यायधीश आर सुभाष रेड्डी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि झारखंड के 11 गैर अनुसूचित जिलों की नियुक्ति पर कोई रोक नहीं है और न ही सुप्रीम कोर्ट में इससे संबंधित कोई मामला सुनवाई के लिए लंबित है. अदालत ने कहा कि प्रार्थी हाई कोर्ट में संशोधित आदेश के लिए याचिका दाखिल कर सकते है. दरअसल, हाई कोर्ट की एकल पीठ ने इस मामले में यह कहते हुए सुनवाई बाद में निर्धारित की है, कि इससे संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि हाई कोर्ट की वृहद पीठ ने गैर अनुसूचित जिलों में होने वाली नियुक्ति पर कभी रोक नहीं लगाई है. क्योंकि नियोजन नीति के तहत गैर अनुसूचित जिलों में स्थानीयता के आधार पर कोई आरक्षण नहीं दिया गया है. इसलिए हाई कोर्ट की वृहद पीठ के पारा 66 में दिए गए आदेश के अनुसार ही गैर अनुसूचित जिलों में नियुक्ति होनी चाहिए. इस पर अदालत ने कहा कि प्रार्थी हाई कोर्ट के आदेश में संशोधन के लिए याचिका दाखिल करें, ताकि इस मामले में सुनवाई की जा सके. चुंकि जिन जिलों में स्थानीय लोगों को शत-प्रतिशत आरक्षण दिया गया था. इसके खिलाफ नियुक्त हुए शिक्षकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जो लंबित है. इसी को आधार बनाकर हाई कोर्ट ने इनकी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के निष्पादन के बाद सुनवाई करने की तिथि निर्धारित की है.




