रांची : झारखंड हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति दीपक रौशन की पीठ ने पश्चिमी सिंहभूम के उन 90 शिक्षकों को बड़ी राहत दी है, जिनके अंतरजिला तबादले के आवेदन को जिला शिक्षा स्थापना समिति ने विगत 24 जुलाई 2025 को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने जिला शिक्षा स्थापना समिति के फैसले को पूरी तरह रद्द करते हुए जिला प्रशासन को उक्त सभी शिक्षकों से संबंधित सारे रेकॉर्ड प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पास भेजने का निर्देश दिया है. (नीचे भी पढ़ें)
बता दें कि जिला प्रशासन ने उक्त शिक्षकों के अंतरजिला तबादले के आवेदनों को सुनवाई के दौरान यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पश्चिमी सिंहभूम में छात्र-शिक्षक अनुपात 51:1है, जिससे जिले के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो जाएगी और करीब 68 स्कूल शिक्षक विहीन हो जाएंगे. न्यायमूर्ति दीपक रौशन की पीठ ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे राज्य सरकार की अपनी ही तबादला नीति के विपरीत करार दिया. कोर्ट ने कहा कि 14 मई 2025 की अधिसूचना के अनुसार, दिव्यांगता और असाध्य बीमारी से जुड़े मामलों में पीटीआर को तबादला रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता है. इसके अतिरिक्त, अंतरजिला स्थानांतरण चूंकि पूरे राज्य के स्तर पर होना है, इसलिए यदि एक जिले से शिक्षक दूसरे जिले में जाएंगे, तो उसी तरह दूसरे जिलों से शिक्षक आ भी सकते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
अदालत ने 24 जुलाई 2025 के उस आदेश को प्रार्थियों तक सीमित रख रद्द करते हुए पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त व डीएसई को उक्त शिक्षकों से संबंधित सभी रिकॉर्ड प्राथमिक शिक्षा निदेशक को भेजने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा निदेशक इन सभी रिकॉर्ड्स की जांच कर लागू नीति के अनुसार तबादले की मंजूरी देंगे और नए आदेश जारी करेंगे. हाईकोर्ट ने इस आदेश की प्रति मिलने के बाद 10 दिन के अंदर यह पूरी प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूरी करने का निर्देश भी दिया है. अदालत ने इन तमाम दिशा-निर्देशों के साथ दोनों रिट याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है, जिनमें कुल 90 शिक्षक शामिल हैं.





