
नयी दिल्ली/ रांचीः झारखंड के न्यायाधीश उत्तम आनंद की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने झारखंड के मुख्य सचिव और डीजीपी को इस मामले में सात दिनों में जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट झारखंड हाईकोर्ट के समक्ष कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है. जज उत्तम आनंद के मामले में स्वत: संज्ञान को इन री सेफगार्डिंग कोर्ट्स एंड प्रोटेक्टिंग जज (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की मृत्यु, धनबाद) नाम दिया गया है. धनबाद के रणधीर वर्मा चौक के पास 28 जुलाई को एडीजे उत्तम आनंद को ऑटो ने टक्कर मारा था. जिसके बाद वहीं उनकी मौत हो गयी थी. जज उत्तम आनंद उस दौरान मॉर्निंग वॉक पर थे. धनबाद जज उत्तम आनंद के मामले को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कोर्ट के संज्ञान में लाया.

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया. विकास सिंह ने कहा कि न्यायाधीश जब सुबह की सैर पर निकले थे, तभी ऑटो से टक्कर मारकर उनकी हत्या की गई. वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने इसे न्यायपालिका पर बेरहमी से हमला बताया था.
विदित हो कि धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश- 8 उत्तम आनंद की मृत्यु हो गई है. रोज की तरह वे मॉर्निंग वॉक करने अपने आवास से गोल्फ ग्रांउड जा रहे थे. इसी दौरान रणधीर वर्मा चौक के आगे जज कॉलोनी मोड पर एक ऑटो ने उन्हें जोरदार टक्कर मारी दी.जिसके बाद तुरंत उन्हें सरकारी अस्पातल मे ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. न्यायाधीश उत्तम आनंद चर्चित रंजय हत्याकांड की सुनवाई कर रहे थे. रंजीत सिंह धनबाद के बाहुबली नेता और झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह के काफी करीबी माने जाते थे. कुछ दिन पूर्व ही शूटर अभिनव सिंह व अमन के गुर्गे रवि ठाकुर की जमानत याचिका इन्होंने खारिज कर दी थी. धनबाद बार एसोसिएशन के द्वारा निर्मित पत्र में न्यायाधीश उत्तम आनंद की मृत्यु को संदेहास्पद बताते हुए बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को रद्द करने की सूचना जारी की गई है.






