
जमशेदपुर : एक तरफ किसी भी राज्य में या किसी भी देश में जनता को सहूलियत दी जाती है, ताकि जनता कम दूरी तय करे. इस पर सड़क को बाईपास कर अहमियत दी जाती है. जनता से कोई भी राय लेकर जनमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है. लेकिन बड़े ताज्जुब की बात है कि जमशेदपुर में कोई भी सड़के बनती है या मोड़ा जाता है तो उन बस्तियों के लोगों की राय लिये बगैर ही जबरन उन पर अपना निर्णय थोपा जाता है. वृद्ध व्यक्तियों व पैदल चलने वालों को दूर तक चल कर सड़क के आर या पार जाना पड़ता है. यह बात भाजपा नेता अभय सिंह ने कही है. उन्होंने इसका ताजा उदाहरण देते हुए कहा है कि काशीडीह के सामने रामलीला मैदान से लेकर काशीडीह के सिंह स्वीट मार्ट तक रोड में डिवाइडर बना दिया गया. एक नंबर लाइन से लेकर 16 नंबर लाइन तक कहीं भी रोड डिवाइडर को पार करने के लिए पथ संचलन नहीं बनाया गया. मोहल्ले की बड़े-बुजुर्गों को बाराद्वारी मैदान व्यायाम करने के लिए कई दूरी तक चक्कर लगाना पड़ता है. जबकि काशीडीह के लोगों को नीचे से आने-जाने का कुछ न कुछ प्रबंध स्थाई होना चाहिए था. वह नहीं हुआ. बार-बार इसको संज्ञान में लाने के लिए जुस्को के अधिकारियों को कहा गया, लेकिन उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगा. (नीचे भी पढ़ें)
अभय सिंह ने कहा है कि यहां अंग्रेजी हुकूमत की तरह अफसरशाही देखने को मिल रही है. नागरिकों की स्वतंत्रता छीनी जा रही है. मनमाने ढंग से कई स्वरूप को बदला जा रहा है. आज जुबिली पार्क को पर्यावरण के नाम पर बंद करना उचित नहीं है. पर्यावरण हर व्यक्ति को प्यारा है. अगर पर्यावरण के नाम पर इस प्रकार की ओछी मानसिकता लेकर काम होगा तो हम सब इसका विरोध करते हैं. उन्होंने कहा है कि जिन लोगों ने भी पर्यावरण की दुहाई दी है कम से कम लोगों ने माना तो जमशेदपुर में पर्यावरण की स्थिति बहुत ही दयनीय है. यानी अब गाड़ी-घोड़ा बंद करनी होगी. लोगों को मोटरसाइकिल-कार बंद करना होगा. हम जानवरों की सुरक्षा की वकालत करते हैं. इसका यह अर्थ नहीं कि झूठा प्रचार-प्रसार कर के सड़क को बंद किया जाए. (नीचे भी पढ़ें)
अभय सिंह ने सवाल किया है कि जिला प्रशासन से सड़कों को जब बंद या डिवाइड किया गया तो क्या इसके लिए जिला प्रशासन की मिशनरी कमेटी ने बैठ कर उसके ड्राइंग को पास किया या नहीं? यदि किया गया है तो जनता की सहूलियत को ध्यान में क्यों नहीं रखा गया. एक पक्ष करके जनता पर कानून क्यों थोपा गया. कानून जनता की हिफाजत के लिए बनता है, जनता को परेशान करने के लिए नहीं? जमशेदपुर के जनरल ऑफिस के सामने एक लाइट पोस्ट लगा हुआ है. इसकी पुष्टि जिला प्रशासन करे किन के कार्यकाल में किन के कालखंड में क्या ट्रैफिक पुलिस या जिला प्रशासन इस में बैठ कर के लिखित रूप से अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया या नहीं ? या अपने मन से अपना कानून के तहत बन गया. जमशेदपुर के बाहर आज मुंबई हो, दिल्ली हो या अन्य शहरों में जनता के कनेक्टिविटी (यातायात) के साधन को बढ़ाने के लिए कई सड़कों को कम दूरी तय हो यह संशोधन किया जाता रहा है, लेकिन जमशेदपुर में एक अनोखा कार्य हुआ है. कभी हमारे मंत्री मेडिका जैसे हॉस्पिटल को बंद करा देते हैं और कभी जुबिली पार्क का रोड बंद करा देते हैं यह सारा खेल मंत्री की सहमति से हो रहा है. कब तक मंत्री ताला खुलवाएंगे यह स्पष्ट किया जाये.





