
नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में चुनाव सुधार से जुड़े बिल को मंजूरी दे दी है. चुनाव आयोग की सिफारिश के आधार पर यह फैसला किया गया है. आधार को वोटर आईडी कार्ड से जोड़ने से फर्जी वोटर कार्ड से होने वाली धोखाधड़ी को रोका जा सकता है. वहीं अब इसे शीतकालीन सत्र में संसद में पेश किया जाएगा. संसद से मंजूरी मिलने के बाद कानूनी तौर पर इसे लागू किया जाएगा. हालांकि विधेयक में यह भी साफ किया गया है कि दोनों कार्ड को लिंक करना अनिवार्य नहीं है. जनता चाहे तो आधार को वोटर आईडी से लिंक कर सकती है या नहीं भी कर सकती है. यह उनके ऊपर छोड़ दिया गया है. इसे स्वैच्छिक रखा गया है. (नीचे भी पढ़ें)
आधार को वोटर कार्ड के जोड़ना का लाभ-
वोटर कार्ड को आधार से जोड़ने पर धोखा घड़ी को रोका जा सकता है. मान लिया जाए कोई व्यक्ति का नाम गांव के वोटर लिस्ट में दर्ज है. परन्तु काम के सिलसिले में बहुत समय से वह गांव छोड़ कर शहर में रह रहा है. वहीं वह शहर के वोटर लिस्ट में भी अपना नाम अंकित करा लिया है. तो वो दोनों ही जगह वोट दे सकता है. इसी प्रकार अगर आधार लिंक हो जाएगा तो उस व्यक्ति का नाम एक ही जगह अंकित होगा. (नीचे भी पढ़ें)
कब से शुरू हुआ सिलसिला-
फरवरी 2015 में भारतीय निर्वाचन आयोग ने वोटर पहचान पत्र को आधार से जोड़ने की शुरुआत की थी. तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एस.एस.ब्रह्मा ने इसे शुरू किया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अगस्त में पीडीएस, एलपीजी और केरोसिन के वितरण में आधार के इस्तेमाल पर रोक लगाने के कारण बाद में इस कार्रवाई को निर्वाचन आयोग ने स्थगित कर दिया था. इस दौरान करीब 38 करोड़ वोटर कार्ड को आधार से लिंक भी कर दिया गया था. (नीचे भी पढ़ें)
चुनाव आयोग ने केंद्र से क्या मांग की-
चुनाव आयोग ने 2019 के अगस्त में कानून मंत्रालय के सचिव को चिट्ठी लिखी थी और कहा था 1950 के कानून में संशोधन होना चाहिए. इससे वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों से बचा जा सकता है.
कई जगहों से वोट देने पर लगेगी लगाम-
2019 के अगस्त महीने में चुनाव आयोग की तरफ से कानून मंत्रालय के सचिव को एक चिट्ठी लिखी गई थी। इस चिट्ठी में जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 और आधार अधिनियम में संशोधन के लिए प्रस्ताव की बात लिखी गई थी। आयोग का तर्क था कि इससे वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों से बचा जा सकता है। आयोग ने पत्र में लिखा था कि आधार को जोड़ने के कारण वोटर कार्ड के फर्जीवाड़े से बचा जा सकता है और फर्जी वोटरों की समस्या से निजात मिल सकती है. (नीचे भी पढ़ें)
विधेयक में क्या-क्या होंगे बदलाव-
विधेयक में इस बार वोटर को आधार से लिंक करने के अलावा वोटर अब साल में 4 तारीखों रप भी अपना नाम मतदाता सूची से जुड़वा सकते है. 4 तारीखों में पहला 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर की तारीख शामिल है. जिसमें 18 वर्ष से ऊपर के मतदाता वोटर आईडी बनवा सकते है.




