
जमशेदपुर : जमशेदपुर में बुधवार को बिहार झारखंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स यूनियन (बीएसएसआर) जमशेदपुर इकाई के सदस्य पहुंचे डीसी कार्यालय और वहां धरना प्रदर्शन किया. प्रदर्शन करके केंद्रीय श्रम मंत्री को ज्ञापन सौंपा. देश के मजदूर वर्ग और देश उद्योग में कार्यरत प्रोत्सहन कर्मियों का बढ़ती हुई छटनी जुल्म वेतन में कटौती, शोषण के खिलाफ अखिल भारतीय विरोध दिवस मनाया गया. बुधवार को एन्टी विक्टिमाइजेसन के रूप में मनाया गया और बीएसएसआर यूनियन जमशेदपुर के करीब 300 ने धरना स्थल पर बैंठे रहे. बीएसएसआर के सेकेटरी बीआर गुप्ता नौकरी खोये हुए कई लोगों के सदस्य नारा लगाते रहे. संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारिनी सदस्य के डी प्रताप ने कहा कि वैसे तो केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी कार्पोरेट परस्त नीति के कारण देश में बेरोजगारी बड़ी है और देश का युवा परेशान है. दवा उद्योग में भारत में काम कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने व्यवसाय का पुनर्गठन के नाम पर फील्ड वर्कर्स की छंटनी की है. ब्यान की शुरूआत एमएसडी से लेकर, ग्लैक्सो, नोवार्टिस, सनोफी और हाल ही में फाइजर ने देश भर में काम कर रहे कई सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी है. बीआर ने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनिया जो कोरोना काल में रिकॉर्ड मुनाफा कमाया वह प्रचार मार्केटिंग द्वारा और मुनाफा कमाने का प्लान बना लिये है. यही सारे कंपनी और दवाई लॉबी के दबाव में सरकार पिछले महिना में 850 दवाई इन बड़े बड़े कंपनी के प्रतिस्पर्धा के चलते भारतीय छोटा मझौले दवा कंपनियों विलय के माध्यम से मौजूदा सेवा शर्तों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन कर रही है. हाल के दिनों में भी यह देखा गया है कि कुछ वित्तीय संस्थान खरीदारी की होड़ में है और अधिग्रहण तेजी से हो रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)
बीएसबी (भारत सौरम) द्वारा टीटीके के उत्पादों को लेने के बाद नई कंपनी में नौकरी पाने वाले फील्डवर्कर्स को अपमानजनक सेवा शर्ते की स्वीकार करने के लिए मजबूर किया और देश की कानूनों का उल्लंघन कर 200 से अधिक फील्डवर्कर्स की छटनी की है. फाइजर प्रबंधन भी 200 से ज्यादा लोगों का नौकरी समाप्त किया. इसी तरह अल्बर्ट डेविड प्रबंधन, प्रोत्सहन कर्मों पर अमनदीय कामकाजी परिस्थितियों को लागू करने का कोशिश किया और विरोध करने पर छटनी तबादला, वेतन में कटौती और फील्ड वर्कर्स को एलओपी (लीन विदाउट पे) करने का काम किया. हिमालय वेलनेस कंपनी ने जीउस डिवीजन के संचालन को बंद कर दिया और अब सभी रणनीति का सहारा लेकर फील्डवर्कर्स को आतंकित करने पर आमादा है. विरोध कर रहे फील्ड वर्कर को धमकियों, तबादलों के रूप में उत्पीड़न, बर्खास्तगी, वेतन में कटौती का सामना करना पड़ रहा है. आश्चर्य की बात है कि सरकार की नाक के तले कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है. एएफडी प्रबंधन भी पूरे देश में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं को खत्म करने के लिए सभी तंत्रों का सहारा लिया और न्यायाधिकरणों में श्रम विवादों के लंबित रहने के दौरान प्रबंधन ने फील्ड वर्कर्स को स्थानांतरित कर दिया. विभिन्न कंपनियों में होने वाली ये सभी घटनाएं आपस में जुड़ी हुई है और पूरे उद्योग का लक्ष्य है कि इस श्रम कानूनों में लचीलेपन का वातावरण बनाना और ज्यादा से ज्यादा मुनाफा के लिये फ्रेंचाइजी और ठेका कमी द्वारा फील्डवर्कर्स के संगठित वर्ग को हटाकर बधवा मजदूर में तब्दिल करना और अपमान जनक सेवा शर्त पर काम कराना है. सचिव विनय कुमार का नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमण्डल ने उपयुक्त के माध्यम से श्रम मंत्री केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा और इन मामलों में अपना ध्यान आकृष्ट किया.





