
जमशेदपुर : झारखंड हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में टाटा स्टील के अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी पी जॉनी राव की हत्या के मामले में उनकी पत्नी पी छंदा राव उर्फ डॉली और उसके प्रेमी शिवनारायण यादव उर्फ छोटका समेत चार लोगों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी. इस मामले में जिन दो और लोगों को हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनायी है, उसमें राजू पोंडवाल और मोहन गुप्ता भी शामिल है. इसमें डॉली कदमा के एक प्लैट में अपने बच्चों के साथ रहती थी, जिसको पुलिस ने जेल भेज दिया है जबकि आरोपी मोहन गुप्ता अब भी फरार है. वहीं, डॉली के प्रेमी शिवनारायण यादव उर्फ छोटका और राजू पोंडवाल की मौत हो चुकी है. इस मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी मोहम्मद अख्तर, सतपाल सिंह उर्फ मिठू, रवि चौरसिया और पप्पू झा उर्फ सुशील झा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है. आपको बता दें कि जमशेदपुर कोर्ट ने इस कांड के सारे आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था. इस कांड में फैसला आने के बाद झारखंड सरकार ने निचली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. इसके आधार पर हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया. अब पत्नी को जेल जाना होगा. उसके पास सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है. उसकी बेटी भी है. इस कारण उसके सामने 18 साल बाद नयी मुश्किल पैदा हुई है. (नीचे भी पढ़ें)
अवैध प्रेम संबंध में पत्नी और प्रेमिका ने भाड़े के हत्यारों के साथ मिलकर दी थी हत्याकांड को अंजाम
टाटा स्टील के अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी पी जॉनी राव सीतारामडेरा न्यू ले आउट में रहते थे. उन्होंने पी छंदा राव उर्फ डॉली से प्रेम विवाह किया था. डॉली से शादी के बाद दोनों को दो बेटी ही थी. उसके ठीक सटे हुए मकान में ही टेंट हाउस संचालक छोटका रहता था. छोटका के साथ डॉली का प्रेम संबंध हो गया. इसका जब जॉनी ने विरोध किया तो पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची और भाड़े के अपराधियों की मदद से 17 जून 2003 को जॉनी की हत्या करा दी. उसको अपने घर से निकलते वक्त ही गोलियों से भून दिया गया था. इस कांड के बाद सनसनी फैल गयी थी. काफी देर के मशक्कत के बाद पुलिस ने पत्नी को ही आरोपी बनाया. बाद में पत्नी ने ही कांड का खुलासा किया, जिसके बाद पुलिस ने एक-एक कर सारे आरोपियों को गिरफ्तार किया. कुल आठ लोगों को इस कांड में आरोपी बनाया गया, जिसमें उस वक्त का कुख्यात अपराधी रवि चौरसिया, मोहम्मद अख्तर, सतपाल सिंह उर्फ मिठू, पप्पू झा उर्फ सुशील झा, मोहन गुप्ता, छोटका, डॉली और राजू पोंडवाल शामिल थे. इस मामले में कांड के 18 साल बाद भी मोहन गुप्ता फरार ही चल रहा है. इस कांड के दो साल के बाद 2005 में सारे आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था. इसके बाद 18 साल तक झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई होती रही. इसके बाद यह फैसला आया और पत्नी समेत चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी गयी. इस मामले में ऐसा टर्निंग प्वाइंट आया कि जिस डॉली ने अपने पति की हत्या करा दी, वह पति को नहीं बचा और कालांतर में चलकर बीमारी से ही छोटका भी मौत हो गयी. इस कांड का दूसरा आरोपी भी मर चुका है जबकि इस कांड का एक गुनहगार फरार है. इस मामले में फैसला आने के बाद पत्नी डॉली 18 साल जेल से बाहर रहने के बाद फिर से जेल जाना पड़ सकता है.











