जमशेदपुर : झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में स्थित सारंडा वन क्षेत्र को सेंचुरी एरिया घोषित करने के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई की और झारखंड सरकार के टालमटोल को लेकर सख्ती दिखायी और मुख्य सचिव को 8 अक्तूबर को सशरीर हाजिर होने को कहा. सुप्राीम कोर्ट ने कहा है कि अगर सेंचुरी एरिया घोषित सरकार नहीं करती है तो दोषी अधिकारियों को सीधे जेल भेजा जायेगा. (नीचे भी पढ़े)
इसको सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का मामला मानते हुए कार्रवाई शुरू की है. मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट ने हाजिर होने को कहा है और जवाब दाखिल करने को कहा है कि क्यों नहीह उनके खिलाफ अवमानना का वाद दायर किया जाये और कार्रवाई की जाये. इस दौरान पीठ ने इस बात की आलोचना की कि राज्य सरकार ने अपने पहले के आदेशों का पालन करते हुए संरक्षण रिजर्व के रुप में अधिसूचित करने के बजाय इस मुद्दे पर आगे विचार के लिए 13 मई को अपने अधिकारियों की एक समिति ही बना दी, जो इस पर पुर्नविचार करेगी. इसको लेकर झारखंड सरकार के टाल मटोल रवैया पर चीफ जस्टिस ने कड़ी नाराजगी जतायी है. (नीचे भी पढ़े)
राज्य सरकार ने पीठ को बताया कि सरकार ने प्रस्तावित अभ्यारण्य क्षेत्र को पहले के 31468.25 हेक्टेयर से बढ़ाकर 57519.41 हेक्टेयर कर दिया है और अतिरिक्त 13603.806 हेक्टेयर क्षेत्र को सासंगदाबुरु संरक्षण रिजर्व के रुप में अधिसूचित करने के लिए चिन्हित किया है. पीठ ने कहा कि प्रस्ताव पहले ही विशेषज्ञ टिप्पणी केलिए देहरादून के भारतीय वन्य जीव संस्थान को भेजा जा चुका है. गौरतलब है कि 29 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट को झारखंड सरकार ने आश्वासन दिया था कि वह 576 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अभ्यारण्य और अतिरिक्त 136 वर्ग किलोमीटर को संरक्षण रिजर्व के रुप में अधिसूचित करेगी. यह इलाका दुनिया का एकमात्र साल पेड़ों का वन है.




