जमशेदपुर : जमशेदपुर के सदर अस्पताल में शनिवार शाम एक नाबालिग और अविवाहित लड़की को प्रसव के बाद छुट्टी देने को लेकर परिजनों ने जमकर हंगामा किया. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, लड़की ने कथित तौर पर अपनी पहचान छिपाकर अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराया और बच्चे को जन्म दिया. मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने उससे और परिजनों से लिखित जानकारी लेने की प्रक्रिया शुरू की है. जानकारी के अनुसार, बिरसानगर निवासी 15 वर्षीय लड़की को 19 अगस्त को प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 20 अगस्त को उसने एक बच्चे को जन्म दिया. 22 अगस्त को उसे छुट्टी देने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने मामले की जानकारी लेने और लिखित बयान लेने के लिए उसे रोकना चाहा. इसी बात को लेकर परिजनों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया और अधिवक्ता शशि भूषण को बुलाया गया. अधिवक्ता के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रशासन ने लड़की को इस शर्त पर घर जाने दिया कि सोमवार को लड़की और लड़का पक्ष के लोग अस्पताल पहुंचकर लिखित बयान देंगे. (नीचे भी पढ़ें)
बड़ी बहन के नाम पर जांच कराने का आरोप : सूत्रों के अनुसार, नाबालिग होने के कारण लड़की ने प्रसव से पहले की जांच और चिकित्सकीय सलाह कथित तौर पर अपनी बड़ी बहन के नाम पर ली थी. सदर अस्पताल में भी वह बड़ी बहन के नाम पर भर्ती हुई. बताया जा रहा है कि उसके 19 वर्षीय प्रेमी की जगह किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज कराया गया था. अस्पताल में आधार कार्ड से चेहरा नहीं मिलने और एक शिकायत मिलने के बाद प्रबंधन को मामले की जानकारी हुई. इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना देने की तैयारी की, लेकिन परिजनों के हंगामे के कारण तत्काल कार्रवाई नहीं हो सकी और लड़की को घर जाने दिया गया. (नीचे भी पढ़ें)
सोमवार को बुलाया गया परिवार : सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ कमलेश प्रसाद ने बताया कि लड़की और उसके परिवार के लोगों को सोमवार को अस्पताल बुलाया गया है. उनसे पूरे मामले को लेकर लिखित बयान लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि जांच में मामला गलत पाया जाता है या पहचान छिपाकर भर्ती होने की पुष्टि होती है, तो पुलिस को इसकी सूचना दी जाएगी.







