जमशेदपुर : कुपोषण के हर आंकड़े के पीछे एक अनकही मानवीय कहानी होती है—एक मां की, जो अपने बच्चे की थाली सम्मान और गरिमा के साथ भरने के लिए हर संभव प्रयास करती है और एक बच्चे की, जो सीखने, हंसने और खेलने के लिए बस इतनी ऊर्जा चाहता है, जितनी एक स्वस्थ बचपन के लिए ज़रूरी है. 1982 में खाद्य एवं पोषण बोर्ड द्वारा 1 से 7 सितंबर को पहली बार राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के रूप में मनाए जाने की शुरुआत के बाद से, यह अवसर हमें लगातार याद दिलाता रहा है कि संतुलित और पौष्टिक आहार किसी विकासशील राष्ट्र की मूल आवश्यकता है—यह केवल कुछ सौभाग्यशाली लोगों तक सीमित विशेषाधिकार नहीं है. आज, जब यह सप्ताह राष्ट्रीय पोषण माह की एक महीने लंबी यात्रा का रूप ले चुका है, तो यह हमारी सामूहिक संवेदना और जिम्मेदारी को भी जागृत करता है—ताकि भूख और स्वस्थ जीवन के बीच बनी उस लंबी दूरी को पाटा जा सके, जो आज भी समाज के एक बड़े हिस्से के सामने चुनौती बनी हुई है. (नीचे भी पढ़ें)

टाटा स्टील के कार्यक्षेत्रों में इस चुनौती की गंभीरता स्पष्ट दिखाई देती है. झारखंड देश में बाल कुपोषण के सबसे अधिक बोझ वाले राज्यों में से एक है. पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं है. यहां 31% बच्चे अविकसित कद से प्रभावित हैं, 29.7% बच्चे कम वजन के हैं, 18.1% बच्चे दुबलापन से प्रभावित हैं, जबकि 6.1% बच्चे गंभीर रूप से दुबलेपन का सामना कर रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)

इस चुनौती से निपटने के लिए दीर्घकालिक और व्यवस्थित प्रयास की आवश्यकता को समझते हुए, टाटा स्टील फाउंडेशन (टीएसएफ) की प्रमुख पोषण पहल, प्रोजेक्ट पोषण, की शुरुआत 2022 में की गई. टाटा स्टील की सामाजिक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप, यह परियोजना एक समग्र और समुदाय-केंद्रित मॉडल के माध्यम से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण की समस्या का समाधान करने के साथ-साथ किशोरियों और प्रजनन आयु की महिलाओं में एनीमिया की चुनौती से भी निपटती है. पिछले तीन वर्षों में, परियोजना ने अपने हस्तक्षेप वाले क्षेत्रों में व्यापक पोषण पैकेज के माध्यम से 3.32 लाख से अधिक लोगों तक सीधे पहुंच बनाई है. इसके अलावा, गंभीर और मध्यम स्तर के कुपोषण से प्रभावित 13,000 से अधिक बच्चों को उपचार और लगातार देखभाल के माध्यम से स्वस्थ वजन पाने में मदद की गई. इसके लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज, समुदाय स्तर पर देखभाल और नियमित फॉलो-अप की व्यवस्था की गई. (नीचे भी पढ़ें)

एनीमिया से प्रभावित 55,000 से अधिक किशोरियों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और प्रजनन आयु की महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार हुआ. उन्हें पोषण संबंधी सलाह, स्वास्थ्य जांच, आयरन-फोलिक एसिड की खुराक और बेहतर स्वास्थ्य आदतों के लिए जरूरी सहयोग दिया गया. बच्चों के विकास की निगरानी, कुपोषण की समय पर पहचान और देखभाल, पोषण संबंधी सलाह तथा जरूरत पड़ने पर उचित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए 1,657 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया. इससे जमीनी स्तर पर पोषण सेवाओं को और मजबूत बनाने में मदद मिली. इसी तरह, 980 आशा कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षण और सहयोग दिया गया, ताकि वे समुदाय तक स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित कर सकें, लोगों को पोषण संबंधी सलाह दे सकें और लाभार्थियों की नियमित निगरानी कर सकें. 22,000 से अधिक परिवारों में पोषण वाटिकाएं विकसित की गईं और उन्हें बढ़ावा दिया गया. (नीचे भी पढ़ें)

इससे परिवारों को अलग-अलग तरह के पौष्टिक भोजन और ताजी सब्जियां आसानी से उपलब्ध हुईं. खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए पौष्टिक आहार की उपलब्धता बढ़ाने और परिवारों की खाद्य सुरक्षा मजबूत करने में इन पोषण वाटिकाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. टाटा स्टील में, जिन समुदायों की हम सेवा करते हैं, वे हमारे उद्देश्य के केंद्र में हैं. उनकी बुनियादी जरूरतों, आकांक्षाओं और बेहतर जीवन की दिशा में काम करना हमारी सामूहिक प्रगति की मजबूत नींव है. हमारे लिए प्रोजेक्ट पोषण सिर्फ स्वास्थ्य सुधारने की पहल नहीं है, बल्कि महिलाओं और बच्चों को उनकी उम्मीद, ऊर्जा और पोषण वापस देने का प्रयास है—ताकि उनका आने वाला हर कल बेहतर संभावनाओं से भरा हो और कोई भी भूख की वजह से अपनी उम्मीद न खोए.















