जमशेदपुर : जमशेदपुर के गैंगस्टर अखिलेश सिंह को बड़ी राहत मिली है. झारखंड हाईकोर्ट ने अखिलेश सिंह को आर्म्स एक्ट के एक मामले में बरी कर दिया है. निचली अदालत की ओर से भी अखिलेश सिंह को भी बरी कर दिया था, लेकिन सरकार की ओर से बरी करने के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इस मामले को लेकर हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि इस मामले में आरोपी अखिलेश सिंह की मिलीभगत साबित नहीं हुई है. यह भी हाईकोर्ट ने पाया है कि जिस जगह से हथियार बरामद होने का दावा किया गया है, उस परिसर पर आरोपी का कोई नियंत्रण नहीं था. (नीचे भी पढ़ें)
गौरतलब है कि जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाना में कांड संख्या 86/2004 से जुड़ा है. पुलिस के अनुसार, 9 अक्टूबर 2004 की रात अखिलेश सिंह ने पूछताछ के दौरान एक क्वार्टर में पिस्टल और कारतूस छिपाकर रखने की जानकारी दी थी. इसके बाद पुलिस टीम ने रात करीब तीन बजे क्वार्टर नंबर 59 में छापेमारी की. पुलिस ने ताला तोड़कर तलाशी ली और बेडरूम की रैक से प्लास्टिक में लिपटी 9 एमएम की पिस्तौल बरामद करने का दावा किया था. पिस्तौल की मैगजीन में 12 कारतूस भी मिले थे. इस मामले में आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इस मामले में अभियोजन पक्ष ने पांच पुलिसकर्मियों की गवाही कराई थी. सभी छापेमारी दल में शामिल थे. पुलिस ने बरामदगी से जुड़े दस्तावेज और स्वीकारोक्ति के कुछ हिस्से भी अदालत में पेश किए थे. (नीचे भी पढ़ें)
जमशेदपुर के अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 12 अगस्त 2021 को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अखिलेश सिंह को बरी कर दिया था. राज्य सरकार ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि न तो स्वीकारोक्ति प्रमाणित हुई और न ही परिसर पर आरोपी का नियंत्रण साबित हो सका. ऐसे में हथियार की बरामदगी को उसके खिलाफ भरोसेमंद सबूत नहीं माना जा सकता. हाईकोर्ट ने अपील की अनुमति और देरी माफ करने से जुड़े आवेदन खारिज कर दिए. इसके साथ ही अखिलेश सिंह को बरी करने का फैसला कायम रहा.





