जादूगोड़ा : ओडिशा के क्योंझर जिले के बसंतपुरा गांव में संताल आदिवासी समाज के धार्मिक पूजानुष्ठान के दौरान हुई तोड़फोड़ की घटना को लेकर हितकू के माझी बाबा बिरास माझी ने गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने इस घटना को लेकर ग्रामीणों के बीच आयोजित बैठक में आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय बताया. बिरास माझी ने कहा कि आदिवासी समाज की पूजा-पद्धति, जाहेर थान, धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक रीति-रिवाज केवल धार्मिक गतिविधियां नहीं, बल्कि हमारी पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत और पहचान के प्रतीक हैं. किसी भी समुदाय की आस्था और धार्मिक परंपराओं को नुकसान पहुंचाना आपसी भाईचारे, संवैधानिक मूल्यों और धार्मिक स्वतंत्रता की भावना के विरुद्ध है. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के साथ सदियों से प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक सद्भाव की भावना को आगे बढ़ाता आया है. ऐसे में धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा और पारंपरिक स्थलों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए. हितकू ( नरवा पहाड़) के माझी बाबा बिरास माझी ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए ओडिशा सरकार एवं संबंधित जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने, घटना में शामिल दोषियों की पहचान करने तथा उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कराने की अपील की है. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने स्पष्ट कहा कि “आदिवासी समाज अपनी जल, जंगल, जमीन के साथ-साथ अपनी आस्था, संस्कृति और परंपराओं के सम्मान के लिए भी प्रतिबद्ध है. धार्मिक स्वतंत्रता किसी एक समुदाय का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है.” उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आदिवासी समाज के धार्मिक स्थलों और पूजा-अनुष्ठानों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं.












