नई दिल्ली : देश में कोरोना की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए केंद्र सरकार भी सतर्क हो गई है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली समेत कई राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर जरूरी कदम उठाने को कहा है. मंत्रालय ने इन सभी राज्यों को नये दिशानिर्देश भी जारी किये हैं. बताते चलें कि 31 मई तक देश में कोरोना के 3207 एक्टिव मामले हो गए है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें केरल सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है, जहां कोरोना के 1,147 एक्टिव मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 227 नए संक्रमण के मामले हैं. महाराष्ट्र में 424 एक्टिव मामले हैं, जहां विगत 24 घंटों में कुल 40 मामले बढ़ गए हैं. दिल्ली में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. 56 नए मामले सामने आए हैं, जिससे कुल संख्या 294 हो गई है. (नीचे भी पढ़ें)
स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने 29 मई को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि मौसम बदलने के साथ ही सांस की बीमारियां बढ़ जाती हैं. ये बीमारियां इन्फ्लुएंजा, आरएसवी जैसे वायरस की वजह से होती हैं. पत्र में लिखा है कि देश के कुछ हिस्सों में सार्स को वी-2 की वजह से होने वाली सांस की बीमारियों के मामलों में थोड़ी बढ़ोतरी देखी जा रही है. उन्होंने यह भी बताया कि ज्यादातर संक्रमण हल्के हैं. अभी ओमिक्रॉन के जेएन1, एक्सएफजी और एलएफ 7.9 वेरिएंट ही मिल रहे हैं. इनसे बुखार, खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण होते हैं, जो अपने आप ठीक हो जाते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
स्वास्थ्य मंत्रालय ने पत्र में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अस्पतालों की तैयारी जांचने के लिए कहा है. इसमें जिला और उप-जिला स्तर के अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, और दूसरे स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं. अस्पतालों में जांच की सुविधा, ज़रूरी दवाएं, पीपीई किट, आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन सप्लाई, क्रिटिकल केयर बेड और वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं होनी चाहिएं. ऑक्सीजन की तैयारी को जांचने के लिए मॉक ड्रिल भी करनी होगी. इसकी रिपोर्ट 2 जून तक भेजनी है. (नीचे भी पढ़ें)
मंत्रालय ने टेस्टिंग प्रोटोकॉल का पालन करने पर भी जोर दिया है. सभी एसएआरआइ मामलों और 5% आइएलआइ मामलों की जांच होनी चाहिए. एसएआरआइ पॉजिटिव सैंपल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए वीआरडीएल सेंटर भेजना होगा. जिला सर्विलांस यूनिट को आइएलआइ/एसएआरआइ के ट्रेंड पर नज़र रखनी होगी. साथ ही, मामलों में एसएआरआइ के अनुपात को भी ट्रैक करना होगा. इन सभी का डेटा पोर्टल पर नियमित रूप से डालना होगा. (नीचे भी पढ़ें)
लोगों को जागरूक करने के लिए हाथ धोने और सांस लेने की सही आदतों के बारे में बताना होगा. खांसते या छींकते समय मुंह को ढकना और सार्वजनिक जगहों पर थूकने से बचना चाहिए. बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए. अगर जाना ज़रूरी हो, तो मास्क पहनना चाहिए. अगर किसी को सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द जैसे लक्षण हों, तो तुरत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. सांस की बीमारियों से बचने के लिए ज़रूरी है कि हम सावधानी बरतें और सरकार के निर्देशों का पालन करें. थोड़ी सी सावधानी से हम खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं.











