शार्प भारत डेस्क : आधुनिक जीवनशैली का लोगों के शारीरिक के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है. वर्तमान जीवन शैली से उत्पन्न मानसिक परेशानियों ने लगभग सभी को शिकार बनाना शुरू कर दिया है. कोई अपने काम से परेशान है तो कोई परिवार की चिंताओं से. कई तो भविष्य की घटनाओं को लेकर आशंकित और भयभीत हैं, जिसके कारण वे मनोरोग से ग्रसित हो रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस बात की पुष्टि करता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में बड़ी संख्या में लोग मानसिक परेशानियों से त्रस्त हैं पर विड़बना यह है कि हम भारतीयों के लिए मनोरोग जैसी कोई चीज होती ही नहीं है. बहुत कम लोग ही मनोरोगों को बीमारी के रूप में देखते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
चिंता, तनाव, अवसाद, पारिवारिक परेशानी, इनकी शुरुआत माने जाते हैं. इनके बढ़ जाने से आत्महत्या का ख्याल भी लोगों के दिमाग में आने लगता हैं. इस स्थिति में व्यक्ति को मनोचिकित्सक की आवश्यकता होती हैं. जानकारी और पैसों के अभाव में लोग डॉक्टर की सलाह नहीं ले पाते और उनकी बीमारी और गहरी होती चली जाती है. इस परेशानी से निपटने से लिए भारत सरकार ने एक पहल की है. इसके तहत आप दिन के 24 घंटे फ्री हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके डॉक्टरी सलाह ले सकते है. इस सेवा की सबसे खास बात यह है कि आप अपनी बोलचाल की भाषा में सलाह प्राप्त कर सकते हैं. टेलीमानस हेल्पलाइन नंबर 1800914416 पर जैसी ही कोई व्यक्ति कॉल करता है, उसकी कॉल को संबंधित राज्य के टेलीमानस सेल में फारवर्ड कर दिया जाता हैं. यहां उपलब्ध डॉक्टर लोगों की समस्या का समाधान करते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सजग होने का समय
मानसिक स्वास्थ्य इस दशक के लिए बड़ी चुनौती के रूप में सामने खड़ा दिख रहा है, खास कर कोरोना महामारी के बाद यह और व्यापक होती दिख रही है. आंकड़ों की बात करें तो वैश्विक स्तर पर साल 2020 के बाद से मनोरोगियों का आंकड़ा काफी तेजी से बढ़ रहा है. कई अध्ययन बताते हैं कि विकसित और विकासशील देशों में हर चार में से एक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के मनोरोग का शिकार है. भारत में यह समस्या इसलिए भी बड़ी है क्योंकि मनोचिकित्सक से मिलना समाज के द्वारा आपके पागल घोषित किए जाने की गारंटी है. इसलिए लोग मनोचिकित्सक से मिलने से कतराते हैं. भारत में अभी भी मनोविकारों को लेकर जागरुकता बहुत कम है. कुलीन समुदाय में थोड़ी बहुत बातें मेंटल हेल्थ को लेकर होती भी हैं तो गरीब और मध्यम वर्गीय भारतीय घरों में मेंटल हेल्थ की बात करना तो दूर, लोग इस विषय में सोचते भी नहीं हैं. जबकि स्थिति यह है कि पूरे विश्व के 15 फीसदी मानसिक रोगी भारत में ही हैं. इसी तरह भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आत्महत्याओं वाला देश बन गया है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटा के अनुसार वर्ष 2021 में 1.64 लाख से अधिक लोगों ने आत्महत्या की थी, जबकि 2020 में यह आंकड़ा 1.53 लाख था.



