
जमशेदपुर : गुड फ्राइडे प्रत्येक वर्ष की तरह ईस्टर के पहले पड़ने वाले शुक्रवार को मनाया जाता है. इसी के साथ गुड फ्राइडे के दिन भारत वर्ष में इस दिन सरकारी छुट्टी होती है. इस त्योहार को देशभर के ईसाई धर्म के लोगों द्वारा मनाया जाता है. इस दिन ईसाई धर्मावलंबी गिरिजाघर जाते है, वहां प्रार्थना सभा आयोजित की जाती है. इसे लेकर गिरिजाघर विशेष प्रकार से सजााया जाता है. पुरानों के मुताबिक गुड फ्राइडे को ईसा मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया था, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई थी. ईसा मसीह की याद में इसे मनाया जाता है. इस दिन ईसाई धर्मावलंबी पूरे दिन का उपवास रखते हैं और प्रसाद के रूप में मिले भोग का सेवन करते हैं. गुड फाइडे के दिन दुःख और तपस्या के साथ शोक प्रकट किया जाता है. वहीं इसकी शुरूआत होती है गुड फ्राइडे से और समाप्ति ईस्टर से साथ होती है. इसे ईसाई धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां लोग ईसा मसीह की प्रार्थना करते हैं. माना जाता है कि यरुशलम के गैलिली प्रांत में ईसा मसीह लोगों के बीच एकता का उपदेश दे रहे थे. उनका उपदेश सुनकर लोग उन्हें ईश्वर का दर्जा देने लगे. वहीं दूसरे प्रान्त के धर्मगुरुओं को इस बात से चिढ़ होने लगी थी कि उन्हें लोगों द्वारा भगवान का दर्जा क्यों दिया जाने लगा. धर्मगुरुओं ने साथ मिलकर यह निर्णय लिया कि वे इसकी शिकायत रोम के शासक पिलातुस से करेंगे. धर्मगुरुओं ने इसकी शिकायत रोम के शासक पिलातुस से की और कहा कि ये व्यक्ति अपने आप को ईश्वर का पुत्र कहता है. धर्मगुरुओं ने बताया कि वह ईश्वर पुत्र नहीं बल्की पापी है और लोगों के बीच ईश्वर का ज्ञान बांटता है. इसके पश्चात ईसा मसीह पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया. उन्हें रस्सी से बांध कर घसीटते हुए पहाड़ पर ले जाया गया जहां उन्हें कीलों से ठोकते हुए शूली पर लटका दिया गया था. जहां उन्हें लटकाया गया था उस जगह को गोलगोथा के नाम से जाना जाता है. इस कहानी की चर्चा बाइबल में भी की गई है. इस दिन को पवित्र माना जाता है ईसा मसीह को क्रूस पर चढ़ा दिया गया था, उसके तीन दिन बाद यानी रविवार को वे जीवित हो गए थे. तभी से यीशु की याद में गुड़ फ्राइडे व ठीक तीन दिन बाद ईस्टर के साथ गुड़ फ्राइडे की समाप्ति होती है.













