
सरायकेला : सरायकेला-खरसावां जिले में शार्प भारत की खबर का असर हुआ है. जहां जिले के तिरुलडीह थाना अंतर्गत कुदा गांव में बीते शनिवार को डायन-बिसाही के आरोप में महिला दुर्गा महतो की पिटाई मामले की प्रशासनिक जांच शुरू हो गई है. गुरुवार को कुकड़ू प्रखंड के बीडीओ गिरजा शंकर महतो कुदा गांव पहुंचे और ग्रामीणों से पूरे मामले की जानकारी ली. हालांकि, पूरे गांव में गुरुवार को भी मातमी सन्नाटा पसरा रहा. लोग घरों में ही दुबके रहे. इस दौरान चांडिल एसडीपीओ और तिरूलडीह थाना प्रभारी राकेश मुंडा भी मौजूद रहे. वही बीडीओ गिरजा शंकर महतो ने जांच के बाद डायन-बिसाही के आरोप में महिला की पिटाई होने की बात स्वीकार करते हुए दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने की बात कही है. साथ ही उन्होंने गांव के मुखिया को तलब करते हुए पूरे मामले में गांववालों के साथ बैठक कर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि 21वीं सदी के भारत में आज भी इस तरह की घटना निश्चित तौर पर शर्मसार करने वाली है. हालांकि सभी आरोपी फरार बताए जा रहे हैं. एसडीपीओ ने दावा किया है, कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे उनकी तलाश जारी है. जल्द ही सभी गिरफ्तार कर लिए जाएंगे. गौरतलब है कि बीते शनिवार को कुदा गांव के ओझा टिंकर मुंडा ने दुर्गा महतो को डायन करार दिया था, जिसके बाद खेमा मुंडा, सीता मुंडा और चांदना मुंडा ने ग्रामीणों के सहयोग से ओझा टिंकर मुंडा के इशारे पर दुर्गा महतो की बेरहमी से पिटाई कर डाली थी किसी तरह से दुर्गा महत्व जान बचाकर थाना पहुंची थी. जहां तिरूल्डीह थाना पुलिस द्वारा महिला को इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल ले जाया गया था. जहां से उसकी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रांची रिम्स रेफर कर दिया गया था. पीड़ित महिला फिलहाल डायन उन्मूलन केंद्र सेंटर बीरबांस में पद्मश्री छुटनी महतो के संरक्षण में है. शार्प भारत ने सबसे पहले इस मामले का खुलासा उस वक्त किया था, जब पद्मश्री छुटनी महतो को जिला परिषद उपाध्यक्ष माझी साव ने पहचानने से इंकार करते हुए इसे ग्रामीणों की समस्या बताते हुए समझौता कराने की बात कही थी. छुटनी महतो ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी. फिलहाल शार्प भारत की खबर का असर हुआ है, और जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है. शार्प भारत 21वीं सदी में जी रहे भारतीयों से अपील करता है, कि अंधविश्वास और ढोंगी ओझाओं और बाबाओं के चक्कर में पड़कर आपसी सौहार्द और भाईचारा को समाप्त होने ना दें. सरायकेला- खरसावां जिला के लिए गौरव की बात है, कि छुटनी महतो जैसी महिला जिले में मौजूद है, जो खुद डायन प्रताड़ना की शिकार हुई थी, लेकिन अपने बुलंद हौसले और मजबूत इरादे के कारण न केवल छुटनी ने अपने लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ा, बल्कि डेढ़ सौ से भी अधिक डायन पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास कराने का कीर्तिमान भी स्थापित किया है. यही कारण है, कि 2021 के लिए छुटनी महतो को पद्मश्री सम्मान के लिए नामित किया गया है. माझी साव जैसे जनप्रतिनिधियों के लिए धिक्कार की बात है, कि जिला परिषद उपाध्यक्ष होने के बाद भी छुटनी महतो को नहीं पहचानते. जिसे आज पूरा देश सलाम कर रहा है. जिस छुटनी महतो की वजह से झारखंड का नाम पूरे देश में रोशन हुआ है. शार्प भारत वैसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की मांग करता है, जो समाज में डायन- बिसाही जैसे कुप्रथा को बढ़ावा देने का काम करते हैं.






