जमशेदपुर : जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इंटर्न हॉस्टल पर वर्षों से कायम अनाधिकृत कब्जे को लेकर आखिरकार जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. शनिवार सुबह साकची स्थित इंटर्न हॉस्टल नंबर-1 और नंबर-2 को खाली कराने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की गई. पूरे अभियान को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए मजिस्ट्रेट की निगरानी में बड़ी संख्या में पुलिस जवानों की तैनाती की गई है. सुरक्षा के मद्देनजर हॉस्टल परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है. अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, दोनों हॉस्टलों के 92 कमरों पर गैर-शैक्षणिक जूनियर रेजिडेंट और अन्य बाहरी लोगों का कब्जा है. इसके कारण मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप कर रहे जरूरतमंद विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है. खासकर वर्ष 2020 बैच के इंटर्न छात्रों को कमरे आवंटित नहीं हो पा रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)

हॉस्टल को कब्जामुक्त कराने के लिए अस्पताल प्रबंधन पहले भी कई बार प्रयास कर चुका था. इस संबंध में 25 नवंबर 2025, 2 अप्रैल 2026 और 8 मई 2026 को नोटिस जारी कर संबंधित लोगों को कमरे खाली करने का निर्देश दिया गया था. बावजूद इसके हॉस्टल के कमरे खाली नहीं किए गए. इसके बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ बलराम झा ने एसडीओ को पत्र लिखकर प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की थी. इसी के बाद शनिवार को पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में अभियान शुरू किया गया. (नीचे भी पढ़ें)
कार्रवाई को व्यवस्थित ढंग से पूरा कराने के लिए अस्पताल अधीक्षक ने चिकित्सकों और कर्मचारियों की विशेष टीम बनाई है. इसमें सर्जरी विभाग के सहायक प्राध्यापक सह वार्डन डॉ शिव चंद्रिका हांसदा, औषधि विभाग के सहायक प्राध्यापक सह वार्डन डॉ मंगेश दोराई, स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग की सहायक प्राध्यापक सह वार्डन डॉ आर्शी परवीन तथा ईएनटी विभाग के सहायक प्राध्यापक सह वार्डन डॉ निहार टोपनो को शामिल किया गया है. इसके अलावा चिकित्सा पदाधिकारी सह कार्यकारी उपाधीक्षक डॉ नारायण उरांव को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है. अभियान के दौरान मनीष कुमार, राजेश प्रसाद सिन्हा और धीरेंद्र कुमार के साथ अस्पताल एवं हॉस्टल के होमगार्ड जवानों को भी प्रतिनियुक्त किया गया है. प्रशासन की इस कार्रवाई से हॉस्टल को कब्जामुक्त कराने और इंटर्न छात्रों को रहने के लिए कमरे उपलब्ध कराने की उम्मीद जगी है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि वर्षों से लंबित इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी हो पाता है.












