
जमशेदपुर : पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में हार के बाद जिस तरह से वहां से भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ हिंसा, बलात्कार, हत्या एवं आगजनी की घटना आये दिनों घटित हो रही हैं, ऐसे अतिसंवेदनशील मौक़े पर अपने-अपने घरों के ऐसी रूम मे बैठकर भाजपा द्वारा नेताओं द्वारा धरना देना पूरी तरह दिखावे की राजनीति एवं नाटक से ज्यादा और कुछ नहीं जान पड़ता है. यह बात अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (युवा) के प्रदेश महामंत्री समरेश सिंह ने कही. उन्होंने कहा है कि जब स्व चंद्रशेखर सिंह देश के प्रधानमंत्री थे और तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्य्मंत्री करूणानिधि के बारे में ख़ुफ़िया एजेंसी ने सूचना दी थी कि उनकी सरकार आतंकवादी संगठन लिट्टे को समर्थन कर रही है तब चंद्रशेखर जी ने तमिलनाडु के राज्यपाल सुरजेन सिंह बरनाला को इस बाबत रिपोर्ट सौंपने को कहा था. पर जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तब अगले ही दिन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाकर तमिलनाडु सरकार को बर्खास्त कर दिया था. जब 52 सांसदों के समर्थन से बनी अल्पमत की सरकार ऐसा कठोर कदम उठा सकती है, तो 303 अपने सांसदों के बल पर पूर्ण बहुमत की केन्द्र सरकार ऐसे कठिन समय में ढकोसला व दिखावे की राजनीति न करे. अपने जान-माल को ताक पर रखकर भाजपा को बंगाल में 3 से 77 सीट दिलवाने वाले कार्यकर्ताओं पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. अतः स्थिति को देखते हुए तत्काल से वहा राष्ट्रपति शाषन लगाया जाये एवं दंगाइयों को चुन-चुनकर सबक सिखाया जाये, ताकि भविष्य मे ऐसी घटनाए न घटे.













