जमशेदपुर : सुंदरनगर के नीलडुंगरी गांव में 6 मई को एक पेड़ पर गमछा के सहारे आत्महत्या करने वाले जीतु (35) के शव का अंतिम संस्कार करने के लिये भी उसके बहनोई के पास रुपये नहीं थे. आर्थिक तंगी के कारण उसके बहनोई भी ओड़िशा से सुंदरनगर नहीं आना चाह रहे थे. लेकिन थाना प्रभारी प्रभात कुमार के कहने पर वे लोग आ गये. बहनोई ने साफ कहा कि जेब में मात्र 10 रुपये ही बचा है. वे शव कैसे लेकर जायेंगे और अंतिम संस्कार कैसे करेंगे. बहनोई ने ही कहा कि अगर यहीं पर अंतिम संस्कार हो जायगा तो उनकी समस्या का समाधान हो जायेगा.(नीचे भी पढ़े)
इसके बाद थाना प्रभारी प्रभात कुमार ने जीतु के अंतिम संस्कार का बीड़ा खुद उठाया. उन्होंने अंत्योदय संस्था के संपर्क किया. इसके बाद संस्था ने पार्वती घाट पर अंतिम संस्कार कराया. इस कार्य में संस्था के सदस्यों ने अहम भूमिका निभाई. जीतु के बहनोई के साथ और दो लोग भी आ गये थे, लेकिन सभी आर्थिक रूप से तंगी थे. किसी के पास भी वापस ओड़िशा जाने के लिये रुपये नहीं थे. इस पर थाना प्रभारी ने आर्थिक रूप से सहयोग कर सभी को ओड़िशा भेजा. इस बीच सभी को भोजन भी कराया.ओड़िशा से आये जीतु के परिवार के लोगों ने बताया कि माता-पिता का पहले ही निधन हो गया है. सूचना मिलने के बाद भी नहीं आना चाहते थे क्योंकि वे आर्थिक रूप से पूरी तरह से तंगी हैं. वे किसी तरह से सुंदरनगर पहुंचे. गरीबी उनके चेहरे पर झलक रही थी.



