जादूगोड़ा : झारखंड सरकार आदिवासियों की विलुप्त होती सबर जनजाति के विकास को लेकर बड़ी- बड़ी दावे करती है लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है. आलम यह है पोटका विधानसभअंतर्गत डुमरिया प्रखंड क्षेत्र के लांगो गांव के पाड़सी गाजाड़ टोला में 12 सबर परिवार रहते है लेकिन उनके यहां पहुंचने के पथ तक नहीं है. भीषण गर्मी व आसमान से टपकती आग के बीच लांगो गांव के पाड़सी गाजाड़ टोला में पानी को लेकर त्राहिमान मचा हुआ. बीते एक एक सालों से सोलर जलमीनार खराब पड़ा हुआ. ऐसे में सबर परिवार गांव से आधा किलोमीटर दूर गड्ढे से अपनी प्यास बुझाने को विवश है. नहाने को लेकर कोई तालाब तक नहीं है ऐसे में यहां के सबर गड्ढे में जमा गंदे पानी से ही स्नान करते है. अबुआ आवास या प्रधानमंत्री आवास तक की सुविधा नहीं है. झोपडी में प्लास्टिक बांध कर बरसात में रात गुजारते है. नौनिहालों के लिए बन रहे आंगनवाड़ी केन्द्र एक सालों से अधूरा पड़ा हुआ है. (नीचे भी पढ़ें)

ऐसे में सबर बच्चे प्लास्टिक टांग कर खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करते है. गांव के सोनिया सबर, झानू सबर कहते है कि बीते एक सालों से सोलर जलमीनार खराब पड़ा हुआ है. ऐसे में आधा किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है, जिसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है. क्षेत्र के जनता दल यूनाइटेड ग्रामीण जिला महासचिव वीर सिंह देवगम कहते है सबर जनजाति के विकास के लिए योजनाएं तो बनती है लेकिन बिचौलिए हावी है व उनके विकास योजनाओं की चट कर जा रहे है. उन्होंने जिले के उपायुक्त से खराब पड़े जलमीनार समेत उनके विकास की योजनाएं चलाने की मांग की है ताकि उनका जीवन स्तर ऊंचा हो सके.







