जमशेदपुर: सहयोग बहुभाषी साहित्यिक संस्था के द्वारा 24 जून को तुलसी भवन के प्रयाग कक्ष में कबीर जयंती एवं सहयोग साहित्यिक संस्था की 25 वर्षों का सफर पूरे होने पर ” आओ अनुभव साझा करें कुछ अपनी कहे, कुछ तुम्हारी सुने” कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जून 2023 से जून 2024 तक रजत वर्ष के रूप में मनाया जाएगा, इसका निर्णय लिया गया था. जिसकी प्रथम कड़ी के रूप में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सहयोग सचिव विद्या तिवारी के स्वागत भाषण से हुआ. नीलांबर चौधरी ने कबीर का भजन “चदरिया झीनी रे झीनी” प्रस्तुत किया.(नीचे भी पढ़े)
मुख्य वक्ता डॉ अरुण सज्जन ने कबीर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए आज के संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला. उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि कबीर की भाषा इतनी सरल और सहज है जिसे साधुक्कड़ी तथा खिचड़ी भाषा भी कहा गया है इसीलिए कबीर आज भी प्रासंगिक है. रेणुबाला मिश्रा ,सुधा गोयल, छाया प्रसाद, बसंत जमशेदपुरी, पुष्पांजलि मिश्रा , अरुण सज्जन, शाहनवाज ,उपासना सिन्हा, ममता कर्ण, अनीता निधि ,सरोज सिंह, आरती ,निवेदिता श्रीवास्तव अनीता सिंह ,शाहनवाज़, बसंत जमशेदपुर, रेणु बाला मिश्रा , अरुणा झा, सभी ने सहयोग से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा किया.(नीचे भी पढ़े)

मुख्य अतिथि के रूप में सहयोग की पूर्व सचिव श्रीमती प्रतिभा प्रसाद उपस्थित थीं. उन्होंने कहा कि संत कबीर भक्तिकाल के निर्गुण काव्यधारा के ज्ञानमार्गी कवियों में सबसे प्रतिभाशाली कवि हैं. कबीर की भक्ति में सभी मनुष्य के लिए समानता की भावना है. साथ ही प्रतिभा ने भी सहयोग से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया. साहित्यकारों को छपने के लोभ से बच कर साहित्य सृजन करना चाहिए. सहयोग की संस्थापिका डॉ जूही समर्पिता ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. उन्होंने कहा कि सहयोग के द्वारा हर साल कबीर जयंती के अवसर पर साहित्य की विभिन्न विधाओं से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे . कबीर के जीवन से जुड़ी एक घटना सुनाते हुए उन्होंने जीवन में संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया, तभी हम सभी अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकते हैं..(नीचे भी पढ़े)

सहयोग की अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ मुदिता चंद्रा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि सहयोग साहित्यिक संस्था के सदस्यों का दायित्व है कि इस संस्था को पुष्पित -पल्लवित करने में सहयोग करें . उन्होंने नए रचनाकारों को निरंतर लिखने की प्रेरणा दी औऱ कहा कि पद लोलुपता से बचना चाहिए. नये साहित्यकारों की लेखनी को अवसर प्रदान करना है सहयोग बहुभाषी साहित्यिक संस्था का लक्ष्य है.इस अवसर पर डॉ शकुंतला पाठक, डॉ पूनम सहाय , कृष्णा सिन्हा डॉ भारती कुमारी ,डॉ पुष्पा कुमारी , रश्मि बारला , पुष्पा तिवारी ,पूर्वी घोष, अंजनी सहाय, तथा अन्य सदस्य उपस्थित थे . सम्पूर्ण कार्यक्रम का सुंदर सफल संचालन श्रीमती माधुरी मिश्रा ने किया.




