जमशेदपुर : जुगसलाई श्री राजस्थान शिवमंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और विश्राम दिवस पर कथा ब्यास आचार्य विनयकांत त्रिपाठी ने श्रद्धालुओं को सुदामा चरित का वर्णन किया. इससे पूर्व आज के यजमान छीतरमल धूत परिवार ने ब्यासपीठ की पूजा की. भागवत् विश्राम दिवस पर कथा प्रसंग पर आगे बढने के पूर्व मंगलाचरण हुआ. ब्यासपीठ से बोलते हुए आचार्य विनय कांत त्रिपाठी ने कहा कि जीवन में धन का सदुपयोग करें, भीषण ओर विपरीत परिस्थितियों में मरणासन्न व्यक्ति को बचाने के लिए, सरकारी केस मुकदमों में विजयी होने के लिए मध्य प्रदेश के दतिया में विराजमान मां पीतांबरा बगलामुखी का अनुष्ठान करें. (नीचे भी पढ़ें)

एसे ही सर्व संकट मोचन के लिए भगवान् श्री हनुमान जी के लांगुल स्तोत्र का श्री हनुमान जी के मंदिर में या पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाकर पाठ करें. उन्होंने कहा कि कलियुग में दो ही खंभे हैं, एक हनुमान और दूसरी मां जगदंबा. कथा प्रसंग के बीच भगवान् श्री राम एवं हनुमान जी के बीच लंका विजय के पश्चात वार्तालाप की भी चर्चा हुई. जामवंत ओर प्रभु श्री राम के बीच लगातार सताइस दिनों तक हुए युद्ध ओर उसके पश्चात जामवंत पुत्री जामवंत के साथ भगवान् श्री राम के विवाह का वृतांत सुनाया, और श्री राम के प्रथम ससुराल जनकपुर के राजा जनक के बुलावे पर जाने की कथा सुनाई गई. भगवान् श्री हनुमान की प्रभु श्रीराम जी के प्रति भक्ति की पराकाष्ठा का सुंदर चित्रण किया. उन्होंने कहा कि जिस घर में सुमति होती है, रामायण होती है, वहां ही माता लक्ष्मी का निवास होता है. (नीचे भी पढ़ें)
आज की में मित्रता ओर मित्र धर्म निभाने की पराकाष्ठा भगवान् श्री कृष्ण और उनके बाल सखा ओर संदीपनी गुरु के आश्रम में एक साथ पढ़े सुदामा के चरित का विस्तार से वर्णन किया. उन्होंने इस कथा के माध्यम से यह संदेश दिया कि दूसरों का हक कभी नहीं खाना चाहिए, काफी गरीबी की स्थिति में सुदामा की पत्नी सुशीला के द्वारा जोर देने पर सुदामा द्वारिकाधीश सरीखे मित्र के यहां पंहुचे, वहां कैसे उनका सम्मान चरणों को धोकर सुदामा के मित्र श्री द्वारिकाधीश ने रुक्मिणी जी के साथ किया और कितना धन-दौलत उन्होंने सुदामा को प्रदान किया, इसकी मार्मिक कथा उन्होंने सुनाई. आज की कथा में श्री राधा, कृष्ण और सुदामा की सुंदर झाकियां सजाई गईं. भगवान श्री कृष्ण के साथ भक्तों ने बड़े उलास के साथ ब्रज की फूलों की होली भी खेली. अंत में धन्यवाद ज्ञापन विश्वनाथ शर्मा ने किया. (नीचे भी पढ़ें)
छीतरमल धूत, अरुण अग्रवाल, दीपक अग्रवाल रामुका, सांवरलाल शर्मा, विश्वनाथ शर्मा, पवन सिंगोदिया, कमल किशोर अग्रवाल, पवन काबरा, मुरलीधर शर्मा, गिरधारी शर्मा, नीरज अग्रवाल समेत कई गणमान्य लोग आज की कथा में विशेष रूप से उपस्थित रहे. अशोक अग्रवाल, मुकेश मित्तल, प्रदीप मिश्रा, मुरलीधर मुकेश, नथमल पवन शर्मा, बिमल अग्रवाल मेंगोतिया, राजकुमार दोदराजका, अमर सिंह आदि सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे. कथा विश्राम दिवस पर ब्यासपीठ का विशेष आभार व्यक्त करते हुए आचार्य विनय कांत त्रिपाठी का सम्मान श्री राजस्थान शिवमंदिर के अध्यक्ष छीतरमल धूत ने किया, साथ ही कथा समाप्ति के पश्चात हवन किया गया.




