
रांची : देश में कोरोना के संकट के बीच बर्ड फ्लू का खतरा मंडराने लगा है. देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू फैल गया है तो झारखंड में भी इसको लेकर अलर्ट कर दिया है. इसके बाद मांसाहारी लोगों की दिक्कतें बढ़ चुकी है. एक तरह से आपदा की स्थिति बर्ड फ्लू को लेकर जारी हो चुकी है. अकेले मध्यप्रदेश में यह हालात है कि 376 कौएं मर चुके है. चिकेन खाने पर भी पाबंदी लगाने की तैयारी है क्योंकि मुर्गा में बर्ड फ्लू होने का खतरा है. इसको देखते हुए झारखंड में पोल्ट्री और पोल्ट्री उत्पाद पर नजर रखने को कहा गया है और जहां भी इसका उत्पादन होता है, वहां के मुर्गियों की मौत की खबरों को देखा जाना चाहिए और सबको ट्रेनिंग देना चाहिए कि क्या स्थिति है. हिमाचल, गुजरात, राजस्थान में इसके खतरे देखे जा रहे है जबकि झारखंड में भी इसका खतरा है. पहले भी जमशेदपुर में कौओं की मौत हो चुकी है. इसको देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है. वैसे पशुपालन विभाग ने अपना एलर्ट जारी करते हुए कहा है कि पक्षियों की मौत होने पर उनके बिसरे की जांच को लैब के लिए तत्काल भेजा जाये. मांसाहारियों की समस्या यहीं नहीं खत्म हो रही है. लोगों के पसंदीदा मांगुर मछली के खाने पर भी पाबंदी लगा दी गयी है. विदेशी मांगुर को खाने पर पूरी तरह पाबंदी लगायी गयी है. हालांकि, बाजारों में यह बिक रहा है, लेकिन मांगुर खाना स्वास्थ्य के लिए हानीकारक पाया गया है. मांगुर मछली को खाने से कैंसर, डाइबिटीज जैसी घातक बीमारियां हो रही है. देशी मांगुर को पालने और बेचने पर कोई पाबंदी नहीं है. एनजीटी ने ही इस पर रोक लगा दी है. 400 ग्राम से ज्यादा का देशी मांगुर नहीं होता है, इस कारण लोगों को सचेत रहकर इस तरह के मांगुर मछली की खरीददारी करनी चाहिए.













