जमशेदपुर : भारत सरकार द्वारा लागू की गयी प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमभीबीआरवाइ) का लाभ कोल्हान प्रमंडल (पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसांवा और पश्चिमी सिंहभूम) के कुल 346 प्रतिष्ठानों ने इस योजना के तहत पंजीकरण कराया है. योजना के अंतर्गत 01अगस्त से अब तक कुल 2031 नये युवाओं ने पहली बार नौकरी प्राप्त की है. इसके अतिरिक्त 7724 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हुआ है, जो पहले भी कार्यरत रह चुके हैं. योजना के दो भाग हैं. भाग एके अंतर्गत पहली बार नौकरी करने वाले युवक- युवतियों को पहले वेतन के साथ कुल 15000 रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिलेगा, जो दो किस्तों में प्रदान किया जायेगा. भाग बी के तहत नियोक्ताओं को प्रोत्साहन स्वरूप प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी पर दो वर्षों तक 3000 रुपये प्रति माह तक की राशि प्रदान की जायेगी. विनिर्माण इकाइयों को यह लाभ चार वर्षों तक मिलेगा. इस योजना के तहत 50 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम 02, जबकि 50 से अधिक वाले प्रतिष्ठानों को 05 नये कर्मचारियों की नियुक्ति करनी होगी. नियोक्ताओं को भुगतान पैन से लिंक खातों में किया जाएगा. (नीचे भी पढे़ं)
इस योजना के तहत प्रतिष्ठान 1 अगस्त से 31 जुलाई 2026 तक अपना पंजीकरण करवा सकते हैं. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना को 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लांच किया था. इसका उद्देश्य देश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और युवाओं को सशक्त बनाना है. 1 लाख करोड़ के बजय वाली यह महत्वाकांक्षी योजना अगले दो साल में 3.5 करोड़ नौकरियां देने का लक्ष्य खती है, खासकर पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं और निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए. इसको इपीएफओ के माध्यम से लागू किया गया है. इसके तहत पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं और उन्हें नियुक्त करने वाले निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं, जैसे एमएसएमइ, मैनुफैक्चरिंग, सर्विसेज और टेक्नॉलॉजी इंडस्ट्री दोनों को सीधा लाभ होगा. निजी क्षेत्र में पहली बार औपचारिक नौकरी मिलने पर 15 हजार रुपये का सीधा लाभ मिलेगा. पहला किस्त 6 माह लगातार काम करने के बाद, दूसरा किस्त 12 माह काम करने के बाद, जिसमें से कुछ राशि बचत साधन में जमा होगी. दूसरी किस्`त पाने के लिए वित्तीय साक्षारता माड्यूल पूरा करना जरूरी है. रोजगार की अवधि 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक का है. पीएफ कटते ही यह लाभ मिलेगा.



