जमशेदपुर / कोल्हान: झारखंड के गृह रक्षकों (होमगार्ड जवानों) को सेवानिवृत्ति के बाद किसी प्रकार की आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलने के मुद्दे को लेकर गृह रक्षा वाहिनी लोक सेवक संघ ने एक बार फिर आवाज बुलंद की है. संघ की प्रदेश समिति के आह्वान पर राज्य के पांचों प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालयों में अलग-अलग तिथियों को ज्ञापन सौंपकर होमगार्ड जवानों के लिए भविष्य निधि (जीपीएफ) एवं सेवानिवृत्ति लाभ की व्यवस्था लागू करने की मांग की गयी है. प्रदेश प्रवक्ता कमल कुमार शर्मा ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष अमर तिरिया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल कोल्हान प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में झारखंड के गृह रक्षकों को बिहार की तर्ज पर भविष्य निधि और सेवानिवृत्ति लाभ उपलब्ध कराने की मांग की गयी है. ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि इस मुद्दे को राज्य विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने शून्यकाल के दौरान उठाया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय या प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है. संघ ने 14 मई 2026 को मुख्यमंत्री को भी इसी संबंध में स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी. इसकी प्रतिलिपि मुख्य सचिव, गृह सचिव, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा संबंधित अधिकारियों को भी प्रेषित की गयी थी. ज्ञापन में प्रमंडलीय आयुक्त से अनुरोध किया गया है कि वे इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार के समक्ष गृह रक्षकों के हित में अनुशंसा करें, ताकि उन्हें भी भविष्य निधि और सम्मानजनक सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त हो सके. (नीचे भी पढ़ें)
सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक असुरक्षा का संकट : संघ का कहना है कि राज्य के हजारों होमगार्ड जवान वर्षों तक विभिन्न सरकारी विभागों, अस्पतालों, प्रशासनिक कार्यालयों और कानून-व्यवस्था संबंधी दायित्वों का निर्वहन करते हैं. इसके बावजूद सेवा समाप्त होने पर उन्हें केवल एक पत्र देकर कार्यमुक्त कर दिया जाता है. न तो पेंशन मिलती है और न ही भविष्य निधि जैसी कोई सुविधा. इस मुद्दे पर हाल ही में एमजीएम अस्पताल से सेवानिवृत्त हुए गृह रक्षक सुधीर कुमार और मदन मोहन गोराई के विदाई समारोह में भी जवानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की. जवानों का कहना था कि राज्य सरकार के लगभग सभी विभागों में कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद किसी न किसी प्रकार की आर्थिक सुरक्षा और लाभ मिलता है, लेकिन गृह रक्षकों को इससे वंचित रखा गया है. (नीचे भी पढ़ें)
बिहार और उत्तर प्रदेश का उदाहरण : संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि पड़ोसी राज्यों बिहार और उत्तर प्रदेश में होमगार्ड जवानों के लिए विभिन्न प्रकार की सामाजिक सुरक्षा एवं सेवानिवृत्ति संबंधी सुविधाएं उपलब्ध हैं. ऐसे में झारखंड के गृह रक्षकों को भी समान लाभ मिलना चाहिए. उनका तर्क है कि वर्षों तक सेवा देने वाले जवानों को वृद्धावस्था में आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार को शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए. (नीचे भी पढ़ें)
होमगार्ड जवानों की प्रमुख मांगों में बिहार की तर्ज पर भविष्य निधि (जीपीएफ) की सुविधा लागू किया जाये, सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सहायता एवं लाभ सुनिश्चित किया जाये, लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार शीघ्र निर्णय ले, गृह रक्षकों के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाये और सेवानिवृत्त जवानों के सम्मानजनक जीवन-यापन की व्यवस्था की जाये.






