रांची : झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-220 के रसुनचोपा से तिरिंग सीमा (4 किलोमीटर) तक के खंड के पुनर्निर्माण को लेकर दायर जनहित याचिका संख्या डब्ल्यूपीए 5110 of 2024 (आकाश शर्मा बनाम भारत सरकार व अन्य) पर पुनः सुनवाई हुई. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ), चाईबासा डिवीजन की ओर से इस अवसर पर एक पूरक हलफ़नामा (सप्लीमेंटरी अफिडेविट) प्रस्तुत किया गया. इसमें यह उल्लेख किया गया है कि सड़क का पुनर्निर्माण कार्य 30 अप्रैल तक पूर्ण कर लिया जाएगा. (नीचे भी पढ़ेें)
हलफ़नामे में यह भी बताया गया कि 3 अप्रैल को पत्र संख्या 369 के माध्यम से ठेकेदार को स्मरण पत्र जारी कर कार्य में तेजी लाने हेतु अधिक मशीनरी एवं श्रमिकों की तैनाती का निर्देश दिया गया है, ताकि कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण हो सके. ज्ञात हो कि इससे पूर्व दायर उत्तर-पत्र (काउंटर एफिडेविट) में पुनर्निर्माण की अंतिम तिथि 14 अप्रैल बताई गई थी. सुनवाई में याचिकाकर्ता अधिवक्ता आकाश शर्मा स्वयं उपस्थित होकर अदालत के समक्ष प्रस्तुत हुए और पीठ को अवगत कराया कि अब जबकि कार्य की नई समयसीमा 30 अप्रैल घोषित की जा रही है. ऐसे में एनएचएआइ चाईबासा डिवीजन को यह निर्देश दिया जाए कि कार्य पूर्ण होने के पश्चात एक स्थिति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) दाखिल करें तथा उसकी एक प्रति याचिकाकर्ता को भी प्रदान की जाए, ताकि उसी आधार पर इस जनहित याचिका का अंतिम निपटारा किया जा सके. (नीचे भी पढ़ें)
उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों के वक्तव्यों को रिकॉर्ड पर लिया और मामले को जून माह (अवकाश के बाद) के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया, साथ ही एनएचएआइ को निर्देशित किया कि पुनर्निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करें. यह जनहित याचिका क्षेत्र की जर्जर सड़क व्यवस्था के विरुद्ध दायर की गई थी, जिसमें गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका और आमजन की सुरक्षा को मुख्य विषय बनाया गया है.











