
जमशेदपुर : झारखण्ड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा प्रकाशित 2018-19 के बैलेंस सीट से उजागर बैंक की आर्थिक बदहाली को लेकर सहकारिता अध्ययन मंडल द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बैंक की स्थिति पर चिन्ता व्यक्त करने के साथ-साथ बैंक के खाताधारियों को उनके जमा पैसे की सुरक्षा के प्रति जागरुक करने हेतु जो खबरे छपवायी गयी. उन खबरों के खिलाफ बैंक के प्रबंधन की बजाय बैंक कर्मचारियों के एक गुट की संस्था कर्मचारी संघ ने सहकारिता अध्ययन मंडल के हवाले से छपी खबरों को तथ्यहीन तथा एकपक्षीय बताते हुए बैंक की स्थिति को काफी मजबूत बताते हुए सहकारिता अध्ययन मंडल पर बैंक के प्रति भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है. इस सम्बन्ध में सहकारिता अध्ययन मंडल के अध्यक्ष विजय कुमार सिंह का कहना है कि समाचार पत्रों में बैंक का 2018-19 का जो बैलेंस सीट छपा है उसे हमने नहीं बल्कि स्वयं बैंक प्रबंधन ने छपवाया है। किसी भी बैंक का बैलेंस सीट सार्वजनिक दस्तावेज होता है तथा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निदेशानुसार इसे समाचार पत्रों में सार्वजनिक रूप से छपवाने का आदेश है. संघ के बयान में कहा गया है कि यह बैंक राज्य के सात जिलों के केन्द्रीय सहकारिता बैंक को मिलाकर बनाया गया है, फिर बैंक का बैलेंस सीट सभी जिलों के समाचार पत्रों में क्यों नहीं छपवाया गया. सहकारिता अध्ययन मंडल ने अपना कर्तब्य निभाते हुए राज्यभर के समाचार पत्रों के माध्यम से बैंक के शेयर होल्डर्स तथा खाताधारियों को इसकी जानकारी दी. समाचार में कहा गया है कि बैंक के अधीन राज्य के 4383 लैम्पस, पैक्स कार्यरत है, जबकि पूरे राज्य में मात्र 123 लैम्पस ही कार्यरत है तथा बैंक से सम्बद्ध है. यह भी कहा गया कि बैंक कोर बैंकिंग प्रणाली से जुड़ी है पर सच यह है कि यह बैंक क्लीयरिंग हाउस का सदस्य तक नहीं है. बैंक अपने ग्राहको के चेक आइडीबीआइ बैंक के माध्यम से क्लियर करवाता है, जिसमें लगभग एक सप्ताह का समय लग जाता है, जिससे ग्राहकों तथा सोसाइटीज को परेशानी तो होती है, सूद का भी काफी नुकसान होता है. अन्य सारी सेवाएं भी आइडीबीआइ बैंक के माध्यम से ही उपलब्ध होता है. विज्ञप्ति में किया गया यह दावा भी हास्यास्पद है कि बैंक के खाताधारकों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है. विज्ञप्ति में किये गये दावे तथा बैलेंस सीट की तुलना से ही यह झूठ उजागर हो जाता है. विज्ञप्ति में 31 मार्च 2019 को बैंक की कुल जमा राशि 1759.23 करोड़ बतायी गयी है, जबकि बैंक द्वारा प्रकाशित बैलेंस सीट में यह राशि गायब हो चुकी है. आज की सच्चाई यह है कि बैंक में कुल जमा राशि मात्र 1495 करोड़ ही बच गयी है. यानि बैलेंस सीट में दर्शायी गयी राशि से 900 करोड़ जमा राशि बैंक से निकल गयी जबकि बैंक की तरल राशि कैश इन हैंड एवं बैलेंस विद बैंक्स मिलाकर सौ करोड़ से कम हो गयी है, जो कि 31 मार्च की कुल जमाराशि का 6 प्रतिशत भी नहीं है. बैंक का बैलेंस सीट वर्ष 2018-19 में 147 करोड़ का घाटा बता रहा है जबकि असल घाटा 300 करोड़ से अधिक का है पर कर्मचारी संघ अपनी विज्ञप्ति में वर्ष 2018-19 में 15 करोड़ परिचालन लाभ अर्जित करने का दावा किया है. बयान में 44 स्थानों में बैंक की 54 करोड़ की चल अचल सम्पत्ति का दावा भी झूठा है. सच्चाई यह है कि बैंक का रांची स्थित मुख्यालय का लीज ही व्ययगत हो गया है. चाईबासा की जमीन पर सहकारिता विभाग ने अपना दावा कर जिला सहकारिता विभाग का भव्य भवन बन गया है. बैंक का अपना भवन ध्वस्त हो रहा है. कुल मिलाकर बैंक प्रबंधन की लापरवाही से बैंक की चल अचल सम्पति डेड एसेट में परिवर्तित हो चुकी है. सच्चाई यह है कि बैंक बरबादी की सीमा रेखा से भी आगे बढ़ चुका है, जिससे बैंक के सारे कर्मचारियों की नौकरियां भी खतरे में पड़ गयी है. बैंक के इसी कर्मचारी संघ ने बैंक की वित्तीय खस्ताहाली के मद्देनजर अपने ही बैंक के कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के लिए 26 जुलाई 2019 को एक दिनी हड़ताल किया था, जिसका दूसरी युनियन को-ऑपरेटिव बैंक इम्प्लाईज यूनियन ने विरोध किया था. आज की तारीख में बैंक की वित्तीय हालत यह है कि वर्षों पूर्व बन्द हुए पलामु जिला सहकारिता बैंक से आये कर्मचारियों के पीएफ, ग्रेच्युटी तथा रिटायरमेंट की अन्य सुविधाओं का भुगतान हाईकोर्ट के आदेशानुसार करने लायक राशि भी बैंक में नहीं बची है. बैंक के लगभग 500 कर्मचारियों के वेतन तथा भत्तों के लिए प्रतिमाह लगभग 50 करोड़ का खर्च है. सभी शाखाओं पर रेमिटेंस तथा अतिथि सत्कार, निदेशकों, अधिकारियों के टीए, कार अलाउंस में हर महीने लाखों का खर्च है. तिजोरी साफ है ये पैसे कहां से आयेंगे? बैंक के संचालन के लिए झारखण्ड सरकार ने 1,46,36,22,885-00 रुपये का ग्रान्ट दिया था. शेयर कैपिटल 16,55,18,036-00 रुपये था. खाताधारियों का जमा 17,59,23,61,118-00 रुपये था. आज की तारीख में बैंक के पास मात्र 1495 करोड़ ही बचे हैं, वह भी तेजी से निकल रहा है. बैंक के अधिकारी, निदेशक मंडल तथा यूनियन थोथी दलील देना छोड़ कर बैंक के ऑडिटर डीएन डोकानिया द्वारा ऑडिट के बाद दिये गये बैलेंस सीट का ठंडे दिमाग से अध्ययन करें तथा इस डूबते बैंक को बचाने का प्रयास करें.




