रांची : झारखंड के ट्राइबल एडवाइजरी कमिटी (टीएसी) की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में यह प्रस्ताव लाया गया कि शिड्यूल एरिया में रेस्टोरेंट, बार और शराब दुकान खोलने के लिए अब ग्राम सभा की मंजूरी लेना जरूरी है. खासकर वैसे ही इलाके जहां पर 50 फीसदी से अधिक आबादी आदिवासी की है वहां ग्राम सभा के अनुमति लेना जरूरी होगा. इस बैठक में पेसा अधिनियम के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई. पेसा अधिनियम से जुड़ी नियमावली को लेकर यह चर्चा हुई कि पहले जेपीआर वन में संशोधन किया जाएगा उसके बाद ही पेसा नियमावली का गठन होगा.(नीचे भी पढ़े)

इस बैठक में सीएनटी एक्ट और एसपीटी एक्ट में आंशिक बदलाव करने पर भी चर्चा की गई. सदस्यों ने सीएनटी एक्ट लागू होने के समय गठित तीन स्थानों को ही फिर से प्रभावी बनाने का समर्थन किया. इस नियम को लागू करने को लेकर कानूनी परेशानी आ सकती है जिसके लिए राज्य सरकार कानून के जानकारो से वार्ता करेंगी और लीगल राय भी लेगी. सारे सुझाव आने के बाद अगली ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा कर फैसला लिया जाएगा. बैठक के दौरान काउंसिल की वैधता को लेकर उठे सवालों पर चर्चा की गयी. राजभवन, बुद्धिजीवी मंच और विधायक चंपई सोरेन की आपत्तियों पर भी चर्चा हुई. इस संबंध में स्टीफन मरांडी ने जानकारी दी कि महाधिवक्ता से राय ली गई है और वर्तमान ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल को वैध माना गया है. खरकई डैम से जुड़े मामलों में, डैम का जलस्तर कम करने पर विचार हुआ ताकि प्रभावित गांवों की संख्या घटाई जा सके. इसके लिए संबंधित अधिकारियों को होमवर्क करने का निर्देश दिया गया है.(नीचे भी पढ़े)

मेसा अधिनियम पर निर्णय फिलहाल स्थगित
बैठक में मेसा अधिनियम से जुड़े विषय को फिलहाल स्थगित कर दिया गया. ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने इस अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन पर राज्य सरकार से मंतव्य मांगा था. प्रस्ताव में कहा गया है कि शेड्यूल एरिया के स्थानीय निकायों में स्टैंडिंग कमेटी की अनुशंसा को बाध्यकारी न माना जाए. (नीचे भी पढ़ें)
वन अधिकार योजना अंतर्गत “अबुआ बीर दिशोम” अभियान के क्रियान्वयन पर चर्चा के उपरांत यह निर्णय लिया गया कि यह “अबुआ बीर दिशोम”व्यापक रूप से लगातार चलाई जाती रहे. यह सुनिश्चित किया जाए कि हर 2 माह में वनपट्टा का वितरण अनिवार्य रूप से हो. वनपट्टा हेतु प्राप्त आवेदनों के अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए स्वीकृति प्रक्रिया अविलंब पूरी किए जाने पर सहमति बनी. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) की धारा 46 के अंतर्गत थाना क्षेत्र की परिभाषा में स्पष्टता लाने हेतु प्रस्ताव पर बिंदुवार चर्चा हुई. सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा 1938 के निर्धारित थाना क्षेत्र के आधार पर छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम के कार्यान्वयन हेतु विभाग एक प्रस्ताव तैयार कर उपस्थापित करे एवं उपरोक्त के संबंध में एक आयोग गठन करने के संबंध में सहमति बनी. उक्त गठित आयोग 6 महीने के भीतर सभी पहलुओं का अध्ययन करते हुए एक प्रतिवेदन समिति को समर्पित करेगी. इसके अलावा बोकारो जिला के ललपनिया में आदिवासी धार्मिक स्थल लगुबुरु में डीवीसी द्वारा पनबिजली परियोजना पर कार्य किए जाने के संबंध में चर्चा की गई. इस संबंध में सदस्यों को अवगत कराया गया कि राज्य सरकार द्वारा आदिवासी धर्म स्थल लगुबुरु को संरक्षित रखने की मंशा से डीवीसी एवं भारत सरकार को अवगत कराया जा चुका है. राज्य सरकार द्वारा पूर्व में ही डीवीसी के इस परियोजना को स्थगित किए जाने का निर्णय लिया गया है. वनपट्टा आच्छादित परिवारों के विद्यार्थियों एवं बच्चे-बच्चियों के आवासीय एवं जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने में जो व्यवधान अथवा कठिनाइयां उत्पन्न हो रही है, उसका समाधान सुनिश्चित की जाए. बैठक में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री – सह – उपाध्यक्ष टीएसी चमरा लिंडा, विधायक-सह-सदस्य टीएसी प्रो स्टीफन मरांडी, लुईस मरांडी, सोनाराम सिंकू, दशरथ गागराई, राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोनगाड़ी, जिगा सुसारन होरो, पोटका विधायक संजीव सरदार, आलोक कुमार सोरेन, सुदीप गुड़िया, जगत मांझी, राम सूर्या मुण्डा, रामचन्द्र सिंह तथा टीएसी के मनोनीत सदस्य नारायण उराँव एवं जोसाई मार्डी उपस्थित रहे.











