चांडिल : चांडिल में झारखंड में पहली बार आयोजित पक्षी महोत्सव यानी बर्ड फेस्टिवल इस वर्ष दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य में सफलता से सम्पन्न हुआ. महोत्सव के तीसरे और समापन दिन पर, दलमा टॉप पिंडरबेड़ा के पास विशेषज्ञों की टोली ने बर्डिंग की. इस दौरान पक्षी प्रेमियों ने कैमरे में विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की शानदार तस्वीरें कैद की. विशेषज्ञों की 10- 10 सदस्यीय चार टोली बनाई गयी, जिन्होंने दलमा के अभयारण्य में पक्षियों का अवलोकन किया और उनकी फोटोग्राफी की. (नीचे भी पढ़ें)
इसके बाद मकूलाकोचा में पावर प्रजेंटेशन का आयोजन किया गया, जिसमें पक्षियों की विभिन्न विशेषताओं पर चर्चा की गयी. इस कार्यक्रम के जरिए यह भी बताया गया कि कैसे दलमा में पक्षियों के संरक्षण के उपाय स्थानीय समुदाय को समझाए जाएंगे, ताकि दलमा में पक्षियों का बसेरा लगातार बढ़े. कार्यक्रम के आयोजकों का मानना है कि यह बर्ड फेस्टिवल स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों को पक्षियों के संरक्षण के प्रति जागरूक करेगा. इसके साथ ही, शोधार्थियों को भी इस क्षेत्र में अध्ययन और शोध के अवसर मिलेंगे. (नीचे भी पढ़ें)
बर्ड फेस्टिवल को हर साल आयोजित करने की योजना है, ताकि दलमा का वन्यजीव विविधता और पक्षियों के संरक्षण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सके. कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने दलमा के कोर एरिया में भ्रमण किया और पक्षियों के बारे में जानकारी प्राप्त की. बर्डिंग करने वाले प्रोसेनजीत सरकार ने बताया कि इस वर्ष दलमा में अल्ट्रामरीन फ्लाई कैचर और ब्लू कैप्ड रॉक थ्रश जैसी रोमांचक पक्षी प्रजातियां देखी गयी. (नीचे भी पढ़ें)
अल्ट्रामरीन फ्लाई कैचर का प्रजनन क्षेत्र पूर्वी अफगानिस्तान से लेकर हेंगडुआन पर्वत तक फैला हुआ है, और यह पक्षी भारत और उत्तर-पश्चिमी इंडोचीन में सर्दियों में पाया जाता है. वहीं, ब्लू कैप्ड रॉक थ्रश हिमालय के घने जंगलों में प्रजनन करता है और सर्दियों में दक्षिणी भारत के निचले इलाकों में पाया जाता है. इसके अतिरिक्त, टैगा फ्लाईकैचर, ग्रीनिश बार्बलर और चिफचैफ जैसे पक्षी नियमित रूप से दलमा में आते हैं, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता को और भी समृद्ध बनाते हैं.



