कांड्रा: सरायकेला- खरसावां जिले में इस भीषण गर्मी में जहां पारा सातवें आसमान पर है और गर्मी का सितम झेल रहे लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है. वहीं दूसरी तरफ कांड्रा और आसपास के क्षेत्र में पेयजल संकट गहरा गया है. लोग बूंद- बूंद शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं. बता दें कि गर्मी के पूर्व ही जिले के उपायुक्त द्वारा प्रत्येक गांव, कस्बों के खराब पड़े चापाकल को दुरुस्त करने का आदेश निर्गत किया गया था, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उदासीनता ने उपायुक्त के आदेश की धज्जियां उड़ा दी और आम लोगों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है. उपायुक्त के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए जनप्रतिनिधियों ने खराब पड़े चापाकल को दुरुस्त करने की दिशा में कोई पहल नहीं की. (नीचे भी पढ़े)

आलम यह है कि लाखों रुपए की लागत से बनाए गए जल मीनार में से 80 फीसदी जल मीनार उचित देखभाल और रखरखाव के अभाव में खराब हो गए है. सिर्फ कांड्रा कस्बे में दर्जन भर से ज्यादा चापाकल अपनी मरम्मत की बाट जो रहे हैं. इन्हें दुरुस्त करने वाला भी कोई नहीं है. स्थानीय मुखिया से लेकर प्रखंड स्तर पर स्थानीय लोगों ने चापाकल को दुरुस्त करने की मांग करते हुए आवेदन दिया, लेकिन इनके आवेदन डस्टबिन की शोभा बढ़ा रहे हैं और लोग बूंद- बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. क्षेत्र में स्थित 2 तालाब भी पूरी तरह सूख गए हैं और अस्तित्व विहीन नजर आ रहे हैं. उनके नीचे की दरारे स्पष्ट दिखाई पड़ रही हैं. (नीचे भी पढ़े)

इनमें एक बूंद भी पानी नहीं है. स्थानीय लोगों के मुताबिक वर्षों से इन तालाबों की साफ- सफाई नहीं की गई है जो आज संकट के रूप में सामने नजर आ रही है. इन सूखे पड़े तालाबों के कारण ना तो लोग धार्मिक अनुष्ठान भली- भांति कर पा रहे हैं और ना ही श्राद्ध कर्म जैसे पारंपरिक रीति- रिवाज ही संपन्न करा पा रहे हैं. इसके अलावा कांड्रा और आसपास के क्षेत्रों में जलापूर्ति योजना के तहत पाइप लाइन से की जाने वाली जलापूर्ति की सुविधा प्राप्त करने के लिए भी अब लोगों को अपनी- अपनी जेब कटवाने पड़ेंगे. पंचायत स्तर पर बनाई गई समिति जो इस योजना की देखभाल कर दी है उसने अब नया कनेक्शन लेने पर उपभोक्ताओं से पांच हजार जमा करने का फरमान जारी किया है. (नीचे भी पढ़े)

इससे विशेषकर गरीब तबके के लोगों के माथे से पसीने छूट रहे हैं और वह इतनी भारी रकम अदा करने में स्वयं को असक्षम महसूस कर रहे हैं. ऐसे में उनके घरों तक शुद्ध पेयजल पाइप लाइन के रास्ते किस तरह पहुंचेगा यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है. वैसे भी इस जलापूर्ति योजना को लेकर पूर्व से ही काफी शिकायतें मिलती रही हैं. कांड्रा के कई मोहल्लों में अभी तक ना तो पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ है और पाइप लाइन बिछाने के प्रति स्थानीय पंचायत के प्रतिनिधि दिलचस्पी ले रहे हैं. इन सभी का खामियाजा तो आम जनता को ही भुगतना पड़ रहा है. (नीचे भी पढ़े)
जब क्षेत्र में 80 प्रतिशत जल मीनार खराब हो, दर्जनों चापाकल खराब पड़े हो, कुआं , तालाब में एक बूंद भी जल नजर नहीं आ रहा हो और भूमिगत जल स्तर भी काफी नीचे गिर चुका हो, तो ऐसे में आम जनता फिर बूंद- बूंद शुद्ध पेयजल के लिए क्यों ना तरसे. ऐसा नहीं है कि आम जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन इससे नावाकिफ है. मगर उनकी चुप्पी ने जहां लोगों को संकट में डाल दिया है वहीं अब आम लोगों में आक्रोश दिखाई पड़ने लगा है.











