जमशेदपुर: सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री एवं इंडियन मैटेरियल्स मैनेजमेंट के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को चैम्बर भवन में अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) विषय पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता परिचर्चा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति दीपक रौशन ने किया. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में टाटा स्टील यूआईएसएल (पूर्व में जुस्को) के प्रबंध निदेशक अतुल भटनागर, झारखंड सरकार के सेवानिवृत्त डीआईजी (फायर एंड सेफ्टी) दीपक सिन्हा तथा जिला न्यायाधीश श्रीमती नमिता चंद्रा उपस्थित थीं. टाटा कमिंस के फायर सेफ्टी विशेषज्ञ मुकेश सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में अग्नि सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं, आवश्यक सावधानियों और कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी. कार्यक्रम में चैंबर के अध्यक्ष मानव केडिया, पूर्व अध्यक्ष मुरलीधर केडिया, निर्मल काबरा, उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल,अभिषेक अग्रवाल, हर्ष बाकरेवाल, कोषाध्यक्ष अनिल रिंगासिया, सचिव भरत मकानी, अंशुल रिंगासिया, विनोद शर्मा सहित शहर के अनेक उद्योगपति, व्यवसायी, बिल्डर, अधिवक्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे.(नीचे भी पढ़े)
नियमों के साथ व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी जरूरी : न्यायमूर्ति दीपक रौशन
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति दीपक रौशन ने कहा कि अग्नि सुरक्षा केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है. बचपन में स्कूलों में नैतिक शिक्षा के साथ आग, पानी और सुरक्षा से संबंधित बातें सिखाई जाती थीं. बचपन में सीखी गई बातें जीवनभर हमारे संस्कारों का हिस्सा बनती हैं. इसलिए बच्चों को शुरू से ही सुरक्षा के बुनियादी नियमों की जानकारी देना आवश्यक है.उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्घटना के बाद हम सरकार और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने लगते हैं तथा जनहित याचिकाएं दायर होती हैं, लेकिन हमें यह भी देखना चाहिए कि एक नागरिक के रूप में हमने अपनी जिम्मेदारी कितनी निभाई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन कर भवनों के नक्शे पास करने वाले अधिकारियों का बचाव नहीं किया जा सकता, लेकिन भवन खरीदने वाले, उसमें रहने वाले और उसका उपयोग करने वाले लोगों की भी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि कई भवनों और अपार्टमेंट में लोग नियमित मेंटेनेंस शुल्क तक नहीं देते, जिसके कारण अग्निशमन उपकरणों का उचित रख-रखाव नहीं हो पाता. बड़े भवनों और आवासीय परिसरों में नियमित बैठकें होनी चाहिए, जिनमें अग्नि सुरक्षा की जांच के लिए एक चेकलिस्ट तैयार की जाए. उन्होंने सभी से अपील की कि दिन के 24 घंटों में से दो-तीन मिनट समाज और उसकी सुरक्षा के बारे में सोचने के लिए जरूर निकालें. उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय पर परिचर्चा आयोजित करने के लिए चैम्बर की सराहना की.(नीचे भी पढ़े)
सुरक्षित शहर के लिए आग की घटनाओं की रोकथाम जरूरी : अतुल भटनागर
टाटा स्टील यूआईएसएल के प्रबंध निदेशक अतुल भटनागर ने कहा कि हमें स्वयं से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या हमारा शहर वास्तव में सुरक्षित है? उन्होंने बिष्टुपुर सहित शहर में हाल के दिनों में हुई आग की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि घटना के बाद दमकल की गाड़ियां पहुंचती हैं, समाचार प्रकाशित होते हैं और फिर हम सब उस घटना को भूल जाते हैं. लेकिन यह जानने का प्रयास नहीं होता कि आग लगने का कारण क्या था और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है. उन्होंने कहा कि आग से होने वाले नुकसान का आकलन करना बहुत कठिन है. इसलिए बचाव और रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय हैं. आज अग्नि सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ एजेंसियां उपलब्ध हैं. प्रत्येक व्यावसायिक प्रतिष्ठान, भवन, अपार्टमेंट और हाउसिंग सोसाइटी में उचित फायर सेफ्टी व्यवस्था, नियमित जांच और आपातकालीन योजना होनी चाहिए. व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा के साथ उचित बीमा भी आवश्यक है. उन्होंने कहा कि शहर के कई इलाके काफी संकरे हैं, जहां आपात स्थिति में दमकल की गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है. इसलिए पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है. एक सुरक्षित शहर ही औद्योगिक विकास और नए निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार कर सकता है. उन्होंने इस पहल के लिए चैम्बर को धन्यवाद दिया.(नीचे भी पढ़े)
न्यायालय परिसरों की सुरक्षा भी अत्यंत महत्वपूर्ण : नमिता चंद्रा
जिला न्यायाधीश श्रीमती नमिता चंद्रा ने कहा कि अग्नि सुरक्षा का विषय न्यायालय परिसरों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है देश के कई सिविल कोर्ट परिसरों में अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है. उन्होंने दूसरे उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका का उल्लेख किया, जिसमें प्रस्तुत रिपोर्ट में कई सिविल कोर्ट परिसरों में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने की बात सामने आई थी. उन्होंने दिल्ली के एक न्यायालय परिसर में आग लगने की घटना का भी उल्लेख किया, जिसके कारण परिसर को बंद करना पड़ा और कई दिनों तक न्यायिक कार्य प्रभावित हुआ. उन्होंने कहा कि न्यायालयों में मुकदमों से जुड़े महत्वपूर्ण मूल दस्तावेज, जैसे सेल डीड, चेक और अन्य कागजात सुरक्षित रखे जाते हैं. इनकी सुरक्षा आम जनता के हित से सीधे जुड़ी हुई है. उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा सिविल कोर्ट परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए उठाए गए कदमों को महत्वपूर्ण बताया.(नीचे भी पढ़े)
नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार अग्नि सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य : मुकेश सिंह
टाटा कमिंस के फायर सेफ्टी विशेषज्ञ मुकेश सिंह ने नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 और झारखंड अग्नि सुरक्षा अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ‘रोकथाम इलाज से बेहतर है’. किसी भी बहुमंजिला इमारत, मॉल, होटल, अस्पताल, सिनेमा हॉल या व्यावसायिक भवन के निर्माण के समय से ही फायर रिस्क असेसमेंट और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने बताया कि कई अपार्टमेंट और व्यावसायिक परिसरों में फायर फाइटिंग सिस्टम तो लगा दिए जाते हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित लोग उपलब्ध नहीं होते. ऐसी स्थिति में आपातकालीन व्यवस्था होने के बावजूद उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता.उन्होंने अपार्टमेंट एसोसिएशन और सोसाइटी के पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे अग्निशमन विभाग से संपर्क कर अपने परिसर में कम से कम दो से चार लोगों को अग्नि सुरक्षा का प्रशिक्षण दिलाएं. फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य उपकरणों की नियमित जांच भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि थोड़ी सी जागरूकता और समय पर उठाए गए कदम बड़ी दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं.(नीचे भी पढ़े)
जुगसलाई में मिनी फायर स्टेशन और संकरे बाजारों में बेहतर व्यवस्था की मांग
परिचर्चा के दौरान जमशेदपुर में हाल के दिनों में हुई आग की घटनाओं, विशेषकर एलआईसी भवन में लगी आग का उल्लेख करते हुए शहर की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई.इस अवसर पर प्रशासन से जुगसलाई में एक मिनी फायर स्टेशन स्थापित करने की मांग उठाई गई, ताकि घनी आबादी वाले क्षेत्र में आग लगने की स्थिति में दमकल की गाड़ियां कम समय में पहुंच सकें और राहत एवं बचाव कार्य शीघ्र शुरू किया जा सके.इसके अलावा साकची बाजार सहित शहर के अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में अतिक्रमण के कारण दमकल की गाड़ियों को पहुंचने में होने वाली परेशानी का मुद्दा भी उठाया गया. वक्ताओं ने कहा कि बाजारों और संकरी सड़कों को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाना चाहिए कि आपात स्थिति में दमकल एवं राहत दल को घटनास्थल तक पहुंचने में कोई बाधा न हो.(नीचे भी पढ़े)
अग्नि सुरक्षा पर जागरूकता प्रत्येक परिवार और प्रतिष्ठान की जरूरत : मानव केडिया
चैम्बर अध्यक्ष मानव केडिया ने कहा कि आज अग्नि सुरक्षा को प्रत्येक व्यक्ति को अपनी प्राथमिकता बनाना चाहिए. जिस तरह हम अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच कराते हैं, उसी तरह अपने घर, दुकान, कार्यालय, फैक्ट्री और आवासीय परिसर की अग्नि सुरक्षा की भी नियमित जांच करनी चाहिए.उन्होंने कहा कि फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म जैसे उपकरण आज आसानी से और अपेक्षाकृत कम लागत पर उपलब्ध हैं. इनकी व्यवस्था छोटी सी चिंगारी को बड़े हादसे में बदलने से रोक सकती है. यह कोई अतिरिक्त खर्च नहीं, बल्कि अपने परिवार, कर्मचारियों, ग्राहकों और संपत्ति की सुरक्षा में किया गया निवेश है.उन्होंने कहा कि चैम्बर व्यापारियों, उद्योगपतियों और आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए आगे भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा. साथ ही प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष शहर की अग्नि सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा.चैम्बर का संदेश स्पष्ट है कि आग लगने के बाद बचाव करने से बेहतर है कि हम पहले से सतर्क रहें. अग्नि सुरक्षा केवल सरकारी नियमों का पालन नहीं, बल्कि अपने परिवार, समाज और शहर के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है.(नीचे भी पढ़े)
कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष मुरली धर केडिया,निर्मल काबरा, उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल, अभिषेक अग्रवाल एवं हर्ष बाकरेवाल, कोषाध्यक्ष अनिल रिंगासिया तथा सचिव भरत माकानी, अंशुल रिंगासिया एवं विनोद शर्मा की सक्रिय उपस्थिति रही. इसके अतिरिक्त मनोज गोयल, चंद्रकांत जातकिया, मनीष आगीवाल, उमंग अग्रवाल, पवन शर्मा, मुकेश मित्तल (जुगसलाई), प्रदीप अग्रवाल, महेश संघी, भव्य मेहता, नवल किशोर बरनवाल, अश्विनी अग्रवाल, अपूर्व लिखमणीय, हेमंत अग्रवाल, अमित खंडेलवाल, सतीश सिंह एवं प्रभात कुमार सहित अनेक सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे.












