रांची: सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी तदाशा मिश्रा को हटाने पद से हटाने से इंकार किया. याचिकाकर्ता द्वारा तदाशा मिश्र को हटाने का आदेश देने की मांग की, जिस पर कोर्ट ने कहा कि तदाशा मिश्र का पक्ष सुने बिना उन्हें नहीं हटा सकते. इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने अमेकस क्यूरी को निर्देश दिया कि सभी राज्यों में हुई डीजीपी की नियुक्ति को लेकर समीक्षा करके रिपोर्ट दें. हालांकि कोर्ट ने झारखंड सरकार द्वारा बनायी गयी डीजीपी नियुक्ति नियमावली को गलत बताया.सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की वर्तमान डीजीपी को अपना पक्ष रखने का अधिकार दिया. कोर्ट ने उनका पक्ष सुने बिना उनकी नियुक्ति रद्द करने से इनकार किया.अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पश्चिम बंगाल और पंजाब में डीजीपी की नियुक्तियों का मुद्दा उठाया. उन्होंने बिहार और अन्य राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति के दौरान प्रकाश सिंह फैसले के कथित उल्लंघनों का भी उल्लेख किया. कोर्ट ने न्यायालय की सहायता के लिए नियुक्त अधिवक्ता एमिकस क्यूरी से देशभर में ऐसे मामलों का अध्ययन करने को कहा. सिब्बल ने प्रकाश सिंह फैसले का पालन करने और डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े झारखंड के नियमों की समीक्षा करने पर सहमति जताई.(नीचे भी पढ़े)
उन्होंने वर्तमान डीजीपी के उत्कृष्ट कार्य की सराहना करते हुए कहा कि इसी कारण उन्हें डीजीपी नियुक्त किया गया था. सुनवाई से संकेत मिलता है कि झारखंड तथा अन्य राज्यों के ऐसे नियमों की जांच होगी कि वे प्रकाश सिंह फैसले के अनुरूप हैं या नहीं. इन नियमों को रद्द करने पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. झारखंड की वर्तमान डीजीपी को उनकी नियुक्ति पर निर्णय लेने से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा.झारखंड सरकार द्वारा बनायी गयी नियुक्ति नियमावली पर एमिकस क्यूरी और केंद्र सरकार की राय अलग-अलग थी. केंद्र सरकार की ओर से मामले की सुनवाई के दौरान यह कहा गया कि झारखंड सरकार द्वारा बनायी गयी डीजीपी नियुक्ति नियमावली, प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये दिशा निर्देश के खिलाफ है. इसमें यूपीएससी की भूमिका नहीं के बराबर है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में इंपैनल कमेटी की बैठक यूपीएससी की अध्यक्षता में होती है. लेकिन झारखंड सरकार द्वार बनायी गयी नियमावली मे यूपीएससी के एक सदस्य को शामिल किया गया है. .(नीचे भी पढ़े)
29 सितंबर को हुई आंशिक सुनवाई के दौरान भी केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने डीजीपी नियुक्ति नियमावली को गलत बताया था. साथ ही यह भी कहा था कि केंद्र ने नियमावली के मामले में अपनी राय छह महीना पहले कोर्ट को दे दी है. साथ ही नियुक्ति नियमावली बनाने को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवमानना बताते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया था. जवाब में कपिल सिब्बल ने यह कहा था कि उन्हें इससे संबंधित कोई नोटिस नहीं नहीं मिला है. ना ही केंद्र सरकार द्वारा दाख़िल की गयी रिपोर्ट से संबंधित कोई जानकारी है.




