
जमशेदपुर : टाटा संस के चेयरमैन के पद पर एन चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति होगी या नहीं, इसको लेकर अटकलों का बाजार चल रहा है. उनकी नियुक्ति पहली बार फरवरी 2017 से की गयी थी. नवंबर 2016 से उनको प्रभार दिया गया था, लेकिन उनका कार्यकाल एक फरवरी 2017 से शुरू हुआ था, जो पांच साल के लिए था. पांच साल फरवरी 2022 में खत्म होने जा रही है. इसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो चुका है. वैसे सूत्र बताते है कि टाटा ट्रस्ट बोर्ड और चेयरमैन रतन टाटा ने उनकी पुन: नियुक्ति के लिए अपनी मंजूरी दे दी है. यह घोषणा मात्र एक औपचारिकता बच गयी है कि एन चंद्रशेखरन को फिर से चेयरमैन बनाया जा रहा है. उनका यह दूसरा कार्यकाल होगा, अगर उनकी फिर से नियुक्ति कर दी जाती है. सूत्र बताते है कि टाटा संस के चेयरमैन के पद पर खुद रतन टाटा ने ही उनकी नियुक्ति करायी थी और वे भी एन चंद्रशेखरन के कामकाज से काफी संतुष्ट है. विपरित परिस्थितियों में टाटा समूह को संभालने वाले एन चंद्रशेखरन की भूमिका सायरस मिस्त्री मामले में रतन टाटा के पक्ष की थी और अगर रतन टाटा की जीत उस मामले में हुई है तो उसके पीछे एन चंद्रशेखरन का ही हाथ था. इसके अलावा रतन टाटा टाटा समूह की कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य को लेकर एन चंद्रशेखरन की सोच को काफी पसंद कर रहे है. जाहिर सी बात है कि टाटा समूह की नवरत्न कंपनियों में शुमार टाटा कंसल्टेंसी, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां अपने घाटे को कम करने में कामयाब रही है. इसके अलावा निवेशकों को भी काफी संतुष्टि मिल रही है. पांच साल में एन चंद्रशेखरन ने टाटा समूह का कायाकल्प कर दिया है और भविष्य को लेकर टाटा समूह को तैयार करने में एन चंद्रशेखरन की काफी महत्ती भूमिका रही है. यहीं वजह है कि उनको लेकर सारे लोग आश्वस्त है कि उनकी पुन: नियुक्ति हो जायेगी. वैसे इस मामले में टाटा समूह ने खुद चुप्पी साध रखी है. कोरोना काल में टाटा समूह को आगे ले जाने और जिस तरह से उदारवादी चेहरा टाटा समूह का दुनिया ने देखा है, उससे भी निवेशक से लेकर टाटा ट्रस्ट और टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा भी संतुष्ट है. (जमशेदपुर के दामाद कैसे है एन चंद्रशेखरन, नीचे पढ़ें)

टाटा समूह के चेयरमैन चंद्रा जमशेदपुर के दामाद है
टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन जिनको प्यार से लोग चंद्रा के रुप में भी जानते है का जमशेदपुर से पुराना रिश्ता है. वे यहां के दामाद है. उनकी पत्नी ललिता की प्रारंभिक शिक्षा जमशेदपुर में ही हुई है. एन चंद्रशेखरन के ससुर एम रामचंद्रन टाटा स्टील में अधिकारी थे. उनकी सास कमला रामचंद्रन डीबीएमएस, कदमा, जमशेदपुर की दो साल तक अध्यक्ष रह चुकी है. वे 1982 से 1984 तक अध्यक्ष रही थी. एन चंद्रशेखरन के ससुर टाटा स्टील से वर्ष 1988 से रिटायर हुए थे. एस रामचंद्रन की दो बेटियां शारदा और ललिता है. वह अपने परिवार के साथ जुस्को ऑफिस के सामने स्थित हिल व्यू रोड के क्वार्टर में रहते थे. दोनों बेटियों की शिक्षा कांवेंट स्कूल में हुई है. ललिता ने 1980 में कांवेंट से दसवीं की परीक्षा पास की है. इसके बाद वे चेन्नई चले गये. चेन्नई में ही सारे लोग रहने लगे, जिसके बाद से लोग वहीं बस गये. हालांकि, एन चंद्रशेखरन और ललिता की शादी जमशेदपुर में ही हुई थी और जमशेदपुर के कई लोग इसके गवाह भी बने थे.


