
जमशेदपुर : नेट जीरो डेवलपमेंट मॉडल ही नेट पॉज़िटिव है. पेट्रोल-डीजल की खपत, कोयला के इस्तेमाल पर पाबंदी जैसे कदम जरूरी है ताकि भविष्य का भारत बेहतर भारत बन सके यह बातें सोमवार को सांसद सह भारत सरकार के फाइनेंस स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कही. इस मौके पर उनके साथ विशिष्ट वक्ता के तौर पर टाटा स्टील के वीपी संजीव पॉल भी मौजूद थे. वे जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित एक बैंक्वेट हॉल में इंडो अमेरिकन चेंबर ऑफ कॉमर्स के आयोजित परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे. जयंत सिन्हा ने कहा कि पेट्रोल डीजल, कोयले की निर्भरता से हमें आगे बढ़ना होगा. ई-वेहिकल को चलन व उपयोग में लाने की नसीहत देते हुए कहा कि सोलर एनर्जी भविष्य का सबसे बड़ा उर्जा का स्रोत है. इसके प्रति प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होना होगा. उन्होंने कॉरपोरेट हाउस, चेंबर जैसी संस्थाएं, सामाजिक संस्थाओं के साथ देश के प्रत्येक नागरिक इसके प्रति जिम्मेदार बनने की बात कही. कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में टाटा स्टील के द्वारा किये जा रहे कार्यों व पहल की सराहना करते हुए देश के अन्य उद्योग घरानों को सीख लेने की बात भी कही. पावर प्वाइंट प्रजेंटेंशन के माध्यम से मौजूद लोगों को देश में कार्बन डाइऑक्साइड की स्थिति और उससे बढ़ रही समस्या से अवगत कराया. श्री सिन्हा ने कहा कि भारत वर्ष 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन तक पहुंचकर हरित सीमा प्राप्त करने का लक्ष्य तय कर चुका है. लेकिन यह लक्ष्य तब तक प्राप्त नहीं होगा जब तक हम इसके प्रति जागरूक नहीं होंगे.
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उन्होंने अपने अंदाज में उदाहरण देते हुए कहा कि हम सभी समुद्र में रहते हैं लेकिन कुएं में होने की गलतफहमी मान बैठे हैं. लोग सोचते हैं कि वे अपने अपने कुएं में सुखी है, लेकिन ऐसा नहीं है हम सभी एक समुद्र में है और वर्तमान में समुद्र में सुनामी (कार्बन उत्सर्जन की समस्या) आयी हुई है जिससे कोई नहीं बच सकता है. समय रहते हम नहीं चेते तो कोविड जैसे और भी वायरस आयेंगे और स्थितियां बदतर होगी. उन्होंने आंकड़ों से बताया कि कोविड से देश भर में दो साल में पांच लाख लोग मारे गये, लेकिन इसी देश में वायु प्रदूषण से होने वाले रोग से हर साल 10 से 20 लाख लोगों की मौत होती है. इसलिए यह समझना आसान है कि हम सभी किस ओर बढ़ रहे हैं. उन्होंने टाटा स्टील की कार्बन उत्सर्जन को लेकर उठाये गये कदमों को सही ठहराया, लेकिन उन्होंने कोयले के इस्तेमाल को कम करने पर बल दिया और कहा कि कोयले का इस्तेमाल कम करने की जरूरत है. सांसद जयंत सिन्हा ने कहा कि देश के सौ करोड़ की आबादी नौकरी के योग्य है, लेकिन 50 करोड़ ही काम करते हैं, इसमें से 40 करोड़ इनफॉर्मल (असंगठित) क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं. 10 करोड़ लोग ही ऐसे हैं जो फार्मल (संगठित) क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं. इसमें भी 6.5 करोड़ प्राइवेट जॉब में है और महज 3.5 करोड़ ही ऐसे हैं जो सरकारी नौकरी कर रहे हैं. उन्होंने खुले मंच से कहा कि कॉरपोरेट सेक्टर से आने वाले टैक्स से सरकार चलती है और सरकारी नौकरी का सजृन होता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हमें फार्म से फैक्ट्री की ओर नहीं बढ़ना है बल्कि फार्म को भी बचाना है. उन्होंने कहा के देश में बेरोजगारी ऐसी कि लोग काम केवल अपनी डिग्री के अनुसार करना चाहते हैं न कि अपनी जरूरत के अनुसार. उन्होंने इसे गलत नहीं माना, लेकिन कहा कि रोजगार करना हमारे हाथ में है. आत्मनिर्भर भारत के लिए सप्लाइ चेन जैसी प्रक्रिया को अपनाने की बात कही. उन्होंने कहा संकट को अवसर में बदलना होगा. वर्तमान में कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने की दिशा में जो प्रयास किये जा रहे हैं वह खुद में एक अवसर है. (नीचे देखे पूरी खबर)

कार्यक्रम में टाटा स्टील के वीपी हेल्थ, सेफ्टी एंड सस्टेनेबिलिटी संजीव पॉल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे. उन्होंने कार्बन उत्सर्जन के जीरो डेवलपमेंट पर विस्तार से जानकारी दी साथ ही टाटा स्टील की ओर से किये जा रहे कार्य की पूरी जानकारी रखी. उन्होंने बताया कि टाटा स्टील ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में तेजी से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में कंपनी का उत्पादन दोगुना हो जायेगा, लेकिन हरित क्रांति के तहत कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर पहल किया जा रहा है. उन्होंने हालांकि, यह जरूर कहा कि कोयले का इस्तेमाल वे लोग जारी रखेंगे. कार्यक्रम का संचालन आइएसीसी के वाइस चेयरमैन (झारखंड) सीडीआर संजीव रमन ने किया. वहीं स्वागत भाषण व विषय प्रवेश चेयरमैन नकुल कमानी ने किया. कार्यक्रम में विशेष रूप से आइएसीसी के पूर्व चेयरमैन एके श्रीवास्तव, नेशनल चेयरमैन कपील कॉल (वर्चुअल मोड से), अमरप्रीत सिंह काले व शहर के उद्योग जगत के लोग मौजूद थे.



