जमशेदपुर : टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टाटा स्टील लिमिटेड में उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी रुजुवलिका इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के विलय को एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने मंजूरी दे दी है. इस संबंध में टाटा स्टील लिमिटेड के कंपनी सचिव एवं मुख्य कानूनी अधिकारी पार्वतीसम कांचीनाधम द्वारा शेयर बाजारों (बीएसइ व एनएसइ) को औपचारिक सूचना भेजी गई है. एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति आशीष कालिया और तकनीकी सदस्य बनवारी लाल मीणा की पीठ ने 1 अक्टूबर को आदेश जारी करते हुए विलय योजना को हरी झंडी दिखाई. यह विलय योजना 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी मानी जाएगी. कंपनी प्रबंधन के अनुसार, इस विलय से टाटा स्टील समूह के कानूनी ढांचे में पारदर्शिता आएगी और कई स्तरों पर होने वाले विनियामक नियमों का बोझ कम होगा. अलग-अलग संस्थाओं के संचालन, प्रशासन और अनुपालन पर होने वाले खर्चों में बड़ी बचत होगी. रुजुवलिका इन्वेस्टमेंट्स, जो कि टाटा स्टील की 100 फीसदी सहायक कंपनी है, के पास मौजूद टाटा स्टील के शेयर विलय प्रभावी होते ही रद्द कर दिए जाएंगे. (नीचे भी पढ़ें)
इसके बदले कोई नए शेयर या नकद भुगतान जारी नहीं किया जाएगा. विलय के बाद रुजुवलिका इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड को बिना किसी लिक्विडेशन प्रक्रिया के समाप्त माना जाएगा और उसकी सभी देनदारियां व संपत्ति टाटा स्टील के अधीन आ जाएंगी. एनसीएलटी के समक्ष कंपनी ने स्पष्ट किया है कि रुजुवलिका इन्वेस्टमेंट्स के पास कोई अलग पेरोल कर्मचारी नहीं थे. वहीं, टाटा स्टील के कर्मचारियों की सेवा शर्तों और रोजगार पर इस विलय का कोई असर नहीं पड़ेगा. कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत होने के कारण सभी लेनदारों और हितधारकों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया तथा क्षेत्रीय निदेशक पश्चिम क्षेत्र की ओर से मिली आपत्तियों के निवारण और अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बाद अदालत ने इस योजना को निष्पक्ष और जनहित के अनुकूल मानते हुए स्वीकृत किया है.




