
जमशेदपुर : टाटा स्टील द्वारा संचालित टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में कोरोना वायरस की टेस्टिंग शुरू कर दी गयी है. कोरोना वायरस की झारखंड में टीएमएच एकमात्र निजी अस्पताल है, जिसमें इसकी टेस्टिंग की सुविधा शुरू कर दी गयी है. टाटा स्टील के ऑनलाइन प्रेस कांफ्रेंस के दौरान टाटा स्टील के मेडिकल सर्विसेज के जीएम डॉ राजन चौधरी ने बताया कि आइसीएमआर की ओर से इसकी टेस्टिंग की मंजूरी दे दी गयी है, जिसको आरटीपीसीआर टेस्ट कहा जाता है. उन्होंने बताया कि शुक्रवार की शाम से टेस्ट शुरू की गयी है, जिसके तहत सात लोगों का सैंपल टेस्ट हुआ, जो नेगेटिव पाया गया जबकि 11 टेस्ट शनिवार की सुबह से लेकर अब तक हो चुकी है. इस टेस्ट की अधिकारिक जानकारी जिला प्रशासन को टीएमएच द्वारा भेजा जाता है. जीएम ने बताया कि जो भी टेस्ट हुआ है, वह नेगेटिव ही पाया गया है. उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन भी अगर मरीज को भेजता है तो उसका भी टेस्ट होगा और खुद से टीएमएच द्वारा भी अपने यहां आने वाले मरीजों का टेस्ट कर सकता है. इसके लिए आम लोगों को 4500 रुपये टेस्ट के लिए देने होंगे. अगर किसी का राशन कार्ड है तो उनका मुफ्त में टेस्ट कराया जायेगा. टाटा स्टील के कर्मचारियों का टेस्ट मुफ्त में ही होगा. 4500 रुपये टेस्ट का पैसे लेने पर पूछे गये सवाल पर जीएम ने बताया कि करीब एक साल के बाद अगर संभव होगा तो टेस्ट का रेट कम हो सकता है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई संभावना नहीं है क्योंकि टेस्ट में लगने वाले सामान व उपकरणों पर भी काफी ज्यादा टेस्ट होता है. उन्होंने बताया कि हर दिन टीएमएच में 40 से 50 टेस्ट किये जा सकते है. उन्होंने बताया कि टीएमएच में जो मरीज आते है, उनका पहले कोरोना वायरस है कि नहीं, उसको देखा जाता है. अगर संदिग्ध लगता है तो उसकी पहले टेस्टिंग होगी. अगर टेस्टिंग में नेगेटिव आयेगा तो उनको सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया जायेगा. टेस्ट रिपोर्ट आने तक सबको आइसोलेशन वार्ड में ही रखा जायेगा. टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ही फैसला लिया जायेगा. टाटा स्टील मेडिकल सर्विसेज के जीएम ने कहा कि अभी टीएमएच के सीसीयू में 13 और नन सीसीयू वार्ड में 4 संदिग्धों को रखा गया है, जिसका टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ही किसी तरह का कोई कदम उठाया जायेगा. उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि टीएमएच में अभी किसी तरह का कोई प्लाज्मा थेरेपी से इलाज संभव नहीं हो सकता है क्योंकि यह प्रयोग की स्थिति में ही है. प्लाज्मा थेरेपी की पुष्टि होने के बाद ही इस इलाज के बारे में किसी तरह का सोचा जा सकता है. जीएम ने बताया कि अभी हाइड्रोक्लोक्वीन जैसी दवाओं का ही इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसकी मंजूरी दी गयी है. उसी के तहत हम लोग काम कर रहे है.



