
जमशेदपुर : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने पूर्व विधायक सह पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ की गयी जांच और कार्रवाई को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर दी है. इसकी अधिकारिक जानकारी विधायक सरयू राय ने अपने ट्विटर हैंडल से दी है. उन्होंने कहा है कि मैनहर्ट घोटाला की जांच में आरोप सिद्ध हो जाने, मुख्य अभियुक्त समेत कई अभियुक्तों का जवाबी बयान आ जाने के बावजूद झारखंड की हेमंत सोरेन की सरकार द्वारा आगे की कार्रवाई नहीं करने के खिलाफ सरयू राय की ओर से झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गयी है. याचिका पर सुनवाई की प्रतीक्षा है. उनके इस कदम से पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय रघुवर दास की मुश्किलें बढ़ सकती है.
क्या है यह मैनहर्ट घोटाला
विधायक सरयू राय ने रांची के सिवरेज-ड्रेनेज सिस्टम को लेकर मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति से लेकर उसको पैसे देने के मामले को उठाया था. जमशेदपुर पूर्वी के वर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने इस मामले को लेकर एक पुस्तक तक लिखी है, जो काफी प्रचारित हुआ था. इस मामले को लेकर पिछले दिनों ही यह शिकायत की गयी थी कि रघुवर दास जब नगर विकास मंत्री के रुप में काम कर रहे थे, तब उन्होंने मैनहर्ट घोटाला किया था. इसको लेकर सरयू राय ने एक पत्र भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा था. इस पत्र में उन्होंने कई सारे तर्क दिये थे. इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी. रांची में सीवरेज ड्रेनेज सिस्टम को लेकर लिखे गये पत्र में सरयू राय ने कहा है कि राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अग्रेतर कार्रवाई के लिये सरकार से अनुमति मांगी थी. इसके पूर्व भी तत्कालीन निगरानी ब्यूरो ने 2009 से 2011 के बीच पांच बार इस मामले की जांच के लिये सरकार से अनुमति मांगी थी, जो नहीं मिली थी. अब तक हुई इस कांड की जांच में पाया गया है कि अयोग्य होने के बावजूद मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति हुई, एक षड्यंत्र के तहत तथ्यों की अनदेखी की गई, जांच के निष्कर्षों को दबाया गया. श्री राय ने मुख्यमंत्री का ध्यान 22 बिंदूओं की ओर आकृष्ट कराया था. मुख्यमंत्री से सरयू राय ने मांग की थी कि मैनहर्ट की बहाली और बहाली में हुई अनियमितताओं पर पर्दा डालने का षड्यंत्र विभिन्न समितियों की जांच के बाद उजागर हो गया है. इसके लिये जिम्मेदार व्यक्तियों का भ्रष्ट आचरण भी सबके सामने आ गया है. भ्रष्ट आचरण और षड्यंत्र रचने के दोषियों पर कार्रवाई होना बाकी है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इसके लिये सरकार से अनुमति मांगी थी. इसके बाद हेमंत सोरेन ने अपना आदेश जारी कर दिया था और मामले की जांच शुरू कर दी गयी थी. इस जांच के पूरा होने के बाद यह कदम उठाया गया है.






